पेटलावद (नईदुनिया न्यूज)। बारिश की बूंदों को सहेजने में सरकारी सिस्टम फेल हो रहा है। कई सरकारी भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगे हैं। हर साल सिस्टम लगाने के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में सिस्टम लगते नहीं। लिहाजा, हर साल करोड़ों लीटर पानी फिजूल बह जाता है। अप्रैल-मई की गर्मी में कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर औसत 500 फीट तक नीचे पहुंच जाता है और टयूबवेल पर आश्रित बड़ी आबादी को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है।

शहर में छोटे-बड़े भवनों को मिलाकर एक दर्जन से ज्यादा सरकारी भवन बने हैं। इन भवनों में कहीं पर भी पानी को सहेजने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। पानी को जमीन के अंदर ले जाकर भू-जल स्तर में सुधार लाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को महत्वपूर्ण माना गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2009 से शासन ने सभी नगरीय निकायों में नए भवन में निर्माण के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया था। प्लाट में भवन के लिए अनुज्ञा जारी करते समय अमानत राशि के रूप में 7 हजार रुपये या प्लाट साइज के हिसाब से राशि जमा कराई जाती है। सिस्टम लगवाने के बाद भवन मालिक द्वारा आवेदन करने पर जमा कराई गई राशि भवन मालिक को वापस कर दी जाती है।

शहर के किस सरकारी भवन में क्या हैं हाल

तहसील कार्यालय - भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। बारिश का पानी सहेजने की कोई व्यवस्था यहां नहीं की गई है। तहसीलदार जितेन्द्र अलावा का कहना है कि भवन पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा। बारिश का पानी सहेजना जरूरी है। सभी विभागों में सिस्टम लगवाएंगे।

शासकीय महाविद्यालय- कॉलेज में विद्यार्थियों को पानी सहेजने का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन कॉलेज प्रबंधन इससे अनजान बना हुआ है। पानी को सहेजने का कोई उपाय नहीं किया गया। प्राचार्य डॉ. कांतु डामोर का कहना है कि कॉलेज में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। मानसून के पहले सिस्टम को लगाने के प्रयास किए जाएंगे।

नगर परिषद - नगर परिषद भी बारिश के पानी को बचाने के लिए गंभीर नहीं है। परिसर में न तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है और न ही लोगों को इसके लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। सीएमओ मनोज शर्मा ने बताया कि नप परिसर में जल्द वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के प्रयास किए जाएंगे। इससे आसपास के इलाके में वाटर लेवल में बढ़ोतरी होगी।

थाना - नगर की सुरक्षा का ध्यान रखने वाला पुलिस महकमा भी बारिश के पानी को बचाने के लिए जागरूक नहीं है। थाने का नया भवन तो बन गया, लेकिन बारिश की बूंदों को सहेजने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। इस संबंध में टीआई संजय रावत का कहना है कि जब से मैं यहां पदस्थ हुआ हूं, तब से लेकर अभी तक थाने का कायाकल्प अच्छी तरह हुआ है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी थाने में लगाया जाएगा।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - बीएमओ पेटलावद का कहना है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम यहां लगाना आवश्यक है। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

जनपद पंचायत - जपं जल संरक्षण के लिए गांवों में स्टापडेम, तालाब, कुएं का निर्माण करती है, लेकिन कार्यालय के भवन पर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है। इससे बारिश में छत पर जमा पानी सड़क और परिसर में फैलता है। पानी सहेजा जाए तो भूजल स्तर बढ़ सकता है।

ये है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

बारिश का पानी जमा करने के लिए जमीन में गड्ढा करना पड़ता है। इसके बाद ऊपरी सतह पर बालू आदि फिल्टर माध्यम डाला जाता है। इसके बाद छत पर गिरने वाले बारिश के पानी को पाइप की मदद से गड्ढे में गिराया जाता है। जलस्तर को बनाए रखने में यह उपयोगी साबित होता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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