झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। चातुर्मास के चलते स्थानीय बावन जिनालय में मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी तथा मुनिश्री जीतचंद्र विजयजी अपनी निश्रा समाजजनों को प्रदान कर रहे हैं। नव दिवसीय शाश्वती नवपद ओलीजी की आराधना का अनुष्ठान इन दिनों चल रहा है। 70 से अधिक आराधक आयंबिल तप की मंगलकारी आराधना में जुड़े हुए हैं। तीसरे दिन के अयाम्बिल करवाने के लाभार्थी नरेंद्र पगारिया परिवार थे।

धर्मसभा में गुरुवार को सिद्धचक्र आराधना के महत्व को समझाते हुए मुनिश्री रजतचंद्रविजयजी ने कहा कि परमात्मा के द्वारा हमें बहुत सारी सुख सामग्रियां प्रदान हुई है। इन सुख सामग्रियां के अंदर हम इतने लीन हो गए कि परमात्मा को ही भूल गए। सिद्धचक्र की आराधना श्रीपाल व मयणा सुंदरी की तरह जीवन को उत्कृष्ट तथा घर परिवार को मजबूत और स्वर्ग समान बनाती है। साथ ही कुष्ठ रोग जैसे रोग भी ठीक होते हैं। इस हेतु प्रत्येक श्रावकों को श्रीपालरास ग्रन्थ का श्रवण करना बहुत जरूरी है।

रामायण देश के लिए आदर्श है

उन्होंने कहा कि जैसे रामायण जिस तरह से देश के लिए आदर्श है वैसे ही श्रीपाल मयणा का जीवन दर्शन भी घर परिवार के लिए आदर्शमय है। हमें तुलनात्मक संतुलित और सरल से जीवन जीने की प्रेरणा ऐसे महान पुरुषों के चरित्र से प्राप्त होती है। इसके बाद दोपहर 3.30 बजे मुनिद्वय की पावन निश्रा में श्रीसंघ के साथ पहली बार 45 आगम यात्रा का वरघोड़ा बावन जिनालय पौषधशाला से प्रारंभ हुआ। नगर के मुख्य मार्गों से होता हुआ राजवाड़ा स्थित दीपक कमलाबाई मुथा के नूतन घर पर पहुंचे। 45 आगम की स्थापना के साथ ज्ञान का वंदन, ज्ञान की भक्ति, ज्ञान की स्तुति आदि का आयोजन किया गया। मुथा परिवार की ओर से श्रीसंघ पूजन किया गया। 45 आगम महोत्सव का तीन दिवसीय उत्सव शुक्रवार दोपहर एक बजे से प्रारंभ होगा। मुनिश्री ने बताया कि जैन जगत में 45 आगम का बहुत महत्व है। आगम के 45 सुंदर जरीवाले छोड़ की सजावट की गई। चातुर्मास समिति अध्यक्ष सुभाष कोठारी और सचिव उत्तम जैन ने बताया कि पूजन के दौरान तीनों दिन विशेष आकर्षक लकी ड्रॉ व प्रभावना व प्रश्नोत्तर पर स्पेशल गिफ्ट दिए जाएंगे। संचालन मनोज जैन मनोकामना ने किया। आयंबिल करवाने व्यवस्था संचालन हेतु चातुर्मास समिति पूर्ण रुप से विशेष सहयोग कर रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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