बोलासा-तारखेड़ी। भैरव अष्टमी नवमी का पर्व अंचल में उत्साह के साथ मनाया गया। भैरु, धुजार महाराज की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की गई। गांव में भैरु, धुजार महाराज का प्राचीन मंदिर है। अष्टमी-नवमी पर दिनभर दर्शनार्थी भक्तों का तांता लगा रहा। यह मंदिर वर्षों पुराना है। प्रसिद्ध विश्व मंगल मंदिर तथा बसाहट होने से पूर्व ही यहां पर भैरु महाराज की मूर्ति स्थापित थी। वैसे तो अलग-अलग समाजों के भैरु महाराज पेड़ों के नीचे या कुएं आदि स्थानों पर बने हैं।

गांव में सार्वजनिक रूप से लोधा, मंगरोलिया परिवार के बने प्राचीन भैरव महाराज के मंदिर में अष्टमी-नवमी पर श्रद्धालुओं का दिनभर आगमन हुआ। स्थानीय लोगों दीपक पटेल, ईश्वर व चरणसिंह ने बताया कि यह स्थान कुलभैरु का है, लेकिन सभी समाज के लोग पूजन व दर्शन के लिए आते हैं। इस बार भी भैरव महाराज के दो अलग-अलग रूपों में पूजा की गई। भैरव महाराज को दूध व मदिरा का भोग लगाया गया। आटे के दीपक बनाकर उसमें तेल रखकर दीपक जलाए गए। काली व सफेद तिल्ली सहित अन्य सामग्री से आहुति देकर हवन किया गया। खीर पुरी चूरमा भोग लगाया गया। उल्लेखनीय है कि हर परिवार में भैरव पूजा का बड़ा महत्व है। परिवार को संगठित रखने के लिए पूजा की जाती है। भैरव महाराज के दर्शन से आशीर्वाद बना रहता है। भैरु महाराज का प्राचीन स्थान यहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

हवन यज्ञ का आयोजन किया

बामनिया। माताजी मंदिर पर नवयुवक नवदुर्गा महोत्सव समिति द्वारा हवन यज्ञ अष्टमी को आयोजन किया गया। इसमें नगर के श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी तथा नगर में सुख-शांति, उन्नाति व कोरोना से पूर्ण मुक्ति की कामना की। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण को फूल-मालाओं तथा रंगोली से सजाया गया।

करड़ावद। सुमधुर गरबा गीतों के साथ नगर में मां की आराधना की गई। महाआरती के बाद गरबा रास का कार्यक्रम देर रात तक चला। माताजी का श्रृंगार किया गया।

राजस्थानी परिवेश में खेला गरबा

पेटलावद। बामनिया मार्ग पर गार्डन में गरबों ने सबका मन मोह लिया। अभिनव गरबों को देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मंगलवार को यहां राजस्थानी परिवेश में गरबा खेला गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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