झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक कम वर्षा ही दर्ज हो पाई है। बावजूद किसान बोवनी कार्य में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। जबकि कृषि विभाग अच्छी वर्षा होने के बाद ही बोवनी करने की सलाह दे रहा है। जिले में सबसे अधिक वर्षा पेटलावद क्षेत्र में 68 मिमी दर्ज हुई है। जबकि जिले में अब तक औसत वर्षा 85 मिमी ही हो पाई है। पिछले वर्ष अब तक 150 मिमी वर्षा दर्ज हो चुकी थी।

इस वर्ष वर्षा ने किसानों को दुविधा में डाल दिया है। अब तक आधी से अधिक बोवनी जिले में हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष मानसून की देरी के कारण किसान बोवनी कार्य नहीं कर पाए। पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर वर्षा का दौर चल रहा था, लेकिन अभी भी 85 मिमी वर्षा ही हो पाई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में कम है। हल्की वर्षा के बाद ही किसान बोवनी में जुटे गए हैं। बुधवार को तो सुबह-सुबह बादल छाए रहे, लेकिन वर्षा का दौर शाम तक नहीं चल पाया।

कहां कितनी वर्षा

केंद्र अब तक वर्षा पिछले वर्ष अब तक की वर्षा

झाबुआ 54.07 94.03

रामा 110.00 141.00

थांदला 57.02 166.02

पेटलावद 178.02 110.07

रानापुर 52.00 219.02

मेघनगर 58.00 171.00

जिले की इस वर्ष की औसत वर्षा 85.00

पिछले वर्ष अब तक औसत वर्षा 150.03

(आंकड़े भू-अभिलेख के अनुसार मिमी में)

इस तरह शुरू हुआ बोवनी का दौर

फसल लक्ष्‌य अब तक हो चुकी बोवनी

मक्का 52000 12000

मूंगफली 7800 1110

सोयाबीन 77000 34000

कपास 33000 17000

आंकड़े हेक्टेयर में कृषि विभाग के अनुसार

दे रहे समाझाइश

कृषि उपसंचालक नगीन रावत ने बताया कि किसानों को सलाह दी जा रही है कि अच्छी वर्षा के बाद ही बोवनी करें। एक-दो दिनों में अच्छी वर्षा होने के संभावना है।

नदी-नाले सभी उफान पर आए

रामगढ़। मंगलवार को हुई तेज वर्षा के बाद क्षेत्र में नदी-नाले सभी उफान पर आ गए थे। क्षेत्र की सबसे बड़ी लाड़की नदी भी शाम को लगभग छह बजे उफान पर आ गई थी, जो कि देर रात 10 बजे तक उफान पर रही व फिर धीरे-धीरे पानी कम होता चला गया। यहां पर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहली बार नदी के उफान में आने से नदी किनारे के कई पेड़-पौधे सूखी लकड़ियां आदि बह गए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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