बरवेट (नईदुनिया न्यूज) जामली रोड स्थित पाटीदार समाज की धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भागवत वक्ता आचार्य राजेश नागर ने कहा कि जिस इंसान में प्रेम होगा उसको में किसी भी रूप में मिलूंगा और जो भगवान की भक्ति में लीन रहता है, जिस रूप में आप भगवान को चाहता है तुम्हें उस रूप में जरूर मिलेंगे। बस चाहना पवित्र हृदय और आत्मा से स्मरण करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि रुक्मणी ने श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाना भी सच्चे व पवित्र मन से चाहना बताता है। रुक्मणी ने श्री कृष्ण की तारीफ सुनकर ही श्रीकृष्ण को अपना प्रेमी और पति बनाने का मन बना चुकी थी। उनको पति के रूप में पाने के लिए अंतर मन और आत्मा से उनको चाहने लगी थी। रुक्मणी ने सच्चे व पवित्र हृदय से श्रीकृष्ण को चाहा, जिसकी आवाज श्री कृष्ण तक पहुंची और रुक्मणी का हरण कर विवाह किया। नागर ने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। रुक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कथा मंडप में विवाह का प्रसंग आते ही चारों तरफ से श्रीकृष्ण-रुक्मणी पर जमकर फूलों की बरसात हुई। नागर ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है, तो वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प तथा कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से मिलते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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