झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक तरफ कोरोना संक्रमण ने सभी को भयभीत कर रखा है। दूसरी तरफ एड्स से भी कई मरीज प्रभावित हुए है। पिछले 10 वर्षों में 78 मरीजों की मौत एड्स के कारण हो चुकी है। अभी भी लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस वर्ष ही 35 मरीज सामने आ चुके है। गत वर्ष 27 मरीज मिले थे। जिले में सबसे अधिक झाबुआ क्षेत्र में मरीज पाए गए है। विशेषज्ञों का कहना है कि पलायन एड्स का सबसे बड़ा कारण है। साथ ही सावधानी नहीं बरतने के कारण भी लोग इससे प्रभावित हो जाते है।

पिछले दस वर्षों में अब तक एड्स से 78 महिला व पुरूषों की मौत हो चुकी है। दस वर्षों में तीन गुना संक्रमण भी बढ़ गया है। जिले के झाबुआ क्षेत्र में सबसे अधिक मरीज है। सबसे कम मरीज पेटलावद क्षेत्र में पाए गए है। जिले में 710 एक्टिव मरीज है। इसमें से 454 पुरूष व 272 महिलाएं है। आश्चर्य की बात यह है कि इस बीमारी से 62 बच्चे भी चपेट में आ चुके है। इन बच्चों में 16 बच्चे अनाथ है। लोगों का कहना है कि झाबुआ में एआरटी यानि इन्ट्री रिट्रो वायरल ट्रिटमेंट सेंटर नहीं होने से मरीजों को अन्य शहर जाकर उपचार करवा कर दवाई लाना पड़ रही है। सेंटर खोलने की मांग कई बार उठ चुकी है, लेकिन इस ओर अब तक ध्यान नहीं दिया गया।

फैक्ट फाइल

- 116 मेघनगर क्षेत्र में मरीज

- 110 थांदला क्षेत्र में मरीज

- 298 झाबुआ क्षेत्र में मरीज

- 90 रामा व रानापुर क्षेत्र में मरीज

- 84 पेटलावद क्षेत्र में मरीज

जिले में लगातार बढ़े मरीज

- 2011 में 200 के करीब थे मरीज

- 10 वर्षों में 788 तक पहुंच गया आंकड़ा

- 78 मरीजों की हो चुकी है मौत

- 710 मरीजों का चल रहा उपचार

- 454 पुरुष मरीज

- 272 महिला मरीज

- 62 बच्चे भी एड्स की चपेट में

इस तरह चला जांच का दौर

वर्ष महिला पुरुष गर्भवती महिला कुल

2019 1028 1010 1840 3878

2020 1030 1011 1835 3876

नहीं है ट्रीटमेंट सेंटर

झाबुआ में एआरटी यानि इन्ट्री रिट्रो वायरल ट्रिटमेंट सेंटर नहीं होने से मरीजों को इंदौर, धार, रतलाम, दाहोद या अन्य शहरों में जाकर अपना उपचार करवाना पड़ता है। हालांकि जिला चिकित्सालय में भी एक यूनिट के माध्यम से दवाइयां वितरित की जाती हैं लेकिन कई मरीज बाहर जाकर अपना उपचार करवा रहे है। ट्रिटमेंट सेंटर खोलने की मांग कई बार की गई लेकिन अब तक इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।

लगातार बढ़े मरीज

सारा सेवा संस्था के निर्देशक जिमी निर्मल का कहना है कि पिछले दस वर्षों में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में कुल 788 मरीज थे। इनमें से 78 मरीजों की मौत हो चुकी है। जिले के हर ब्लॉक में एड्स के मरीज है। संस्था द्वारा समय-समय पर उन्हें दवाईयां उपलब्ध कराई जाती है। लॉकडाउन के दौरान तो संस्था द्वारा उन्हें घर जाकर दवाइयां उपलब्ध कराई गई थी। वर्ष 2011 में 200 ही मरीज थे। अब लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। लोग सावधानी नहीं बरत रहे है।

जिला अस्पताल के एड्स प्रभारी डॉ. जितेन्द्र बामनिया का कहना है कि जिले में 710 मरीज है। दिसम्बर 2019 से नवंबर 2020 तक 35 मरीज एचआईवी से पीड़ित पाए गए हैं। जिला चिकित्सालय से मरीजों को मार्गदर्शन के साथ दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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