परंपरा : बालिकाएं घर की दीवार पर चांद, तारे, सूरज की आकृति बनाकर कर रही आरती

बड़वाह। नईदुनिया न्यूज

श्राद्धपक्ष के साथ ही नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाएं संझा पर्व मना रही हैं। नगर के गणगौर घाट, बजरंग घाट, टावरबैड़ी आदि स्थानों पर यह पर्व मनाया जा रहा है। 16 दिवसीय पर्व में बालिकाएं घर की दीवार पर चांद, तारे, सूरज की आकृति बनाकर प्रतिदिन आरती कर रही हैं। ग्राम कोदल्याखेड़ी की भाग्यश्री बताती हैं कि उनके यहां पिंकी, सीमा, रजनी, मोनिका आदि बालिकाएं संझा पर्व मना रही हैं। शहरों में सीमेंट-कांक्रीट के पक्के मकानों का चलन बढ़ा, गोबर की कमी हुई तब से यह पर्व सिमटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पर्व को विलुप्ति से बचाने के लिए ग्राम की बुजुर्ग महिलाएं बालिकाओं को प्रेरित कर रही है।

भग्यापुर में भी मनाया जा रहा पर्व

भग्यापुर। ग्राम में संझा माता का पर्व बालिकाएं मना रही हैं। प्रतिदिन शाम को दीवारों पर गोबर की अलग-अलग आकृतियां बनाई जा रही है। सभी सहेलियां एकत्र होकर एक दूसरे के घर जाकर संझा माता के गीत गाकर संझा माता को प्रसन्ना करती हैं। ग्राम की चंचल मालवीया, मोहिनी मालवीया, अंतिम मालवीया, प्रियांशी मालवीया, गुनगुन आदि प्रतिदिन 'आरती करो भई आरती करो, संझा नी आरती' आदि गीत गा रही है।

-14केजीएन-164-बड़वाह में संझा माता की आकृति बनाती हुई बालिका। -नईदुनिया

-14केजीएन-165-भग्यापुर में संझा माता की आकृति बताती हुई बालिकाएं। -नईदुनिया