कटनी(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले का आपदा प्रबंधन विभाग वाहनों की कमी से जूझ रहा है। एक ही वाहन के भरोसे जिले का आपदा प्रबंधन है। हालांकि आपदा प्रबंधन कार्यालय झिंझरी कटनी द्वारा कहा जा रहा है कि समय पर वाहन अधिग्रहित कर लिए जाते हैं लेकिन आपदा बताकर नहीं अचानक आती है। इसलिए विभाग को विजयराघवगढ़, ढीमरखेड़ा , बहोरीबंद में भी वाहनों की जरूरत है।

जिले इस वर्ष मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है। आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए जहां नागरिक सुरक्षा के लिए की जा रही तैयारियों में बिना संसाधन बढाएं ही आपदा से निपटने की तैयारी होम गार्ड झिंझरी स्थित होमगार्ड कार्यालय में की जा रही है। गाड़ा पड़रिया डेंजर जोन में है। खितौली से उमरिया रोड बगदरा के पास भदार नदी के कारण डूब जाता है। यही नदी के कारण खितौली से करचुलिया के पास डूबता भी डूबता है। जिले में करीब 10 डेंजर जोन चिन्हित की गई है जहां बारिश अधिक होने पर आवागमन विधित होता है। बारिश के दिनों में विभाग के पास सूचना आने पर विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए विभाग के पास अभी संसाधनों की कमी बनी है।

रिपेयरिंग को भेजा जनरेटर : नागरिक सुरक्षा संगठन कई वर्ष पुरानी मोटर वोट के सहारे व उनकी मरम्मत कराने किसी तरह जानमाल की रक्षा में जुटते है। विभाग के पास मात्र 4 मोटर वोट उपलब्ध है जबकि 8 मोटर वोट उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव लंबित पड़ा हुआ है। मानसून में मूसलाधार बारिश होने पर 4 वोट, रस्सा, फर्स्टएड बाक्स, लाउड हेलर व इंजनों को रखने के लिए ट्राली व आवागमन के लिए वाहनों की मांग की गई है। वही तीन मोटर सुधार कार्य के लिए जबलपुर भेंजी गई है।

वाहनों की भी कमी : बाढ़ की सूचना मिलने पर वाहन में मोटर वोट रखने के बाद होमगार्ड जवानों के लिए वाहन में बैठने की जगह नहीं बचती सूचना मिलने पर मोटर वोट भेंजे या जवान दोनों में से एक ही वाहन से बाढ़ स्थल जा सकते है। दूसरे के लिए वाहन का इंतजार करना पड़ता है।

ये हैं डेंजर जोन : ढीमरखेड़ा के झिन्ना पिपरिया मार्ग पर स्थित मौरी नदी पर स्थित रपटा कुछ घंटे की बरसात में होने पर डूब जाता है। बेलकुंड व हिरण नदी में बाढ़ आने पर इटौली, कंजिया, छोटा कछार, गांव पानी से चारों तरफ से घिर जाते है। इन गांवों में ममद के लिए मोटर वोट भी नहीं पहुंच पाती। विजराघवगढ़ से बंजारी के बीच झपावन नदी में बाढ़ आने पर आवागमन अवरूद्ध होता है। विजयराघवगढ़-बरही मार्ग पर स्थित छोटी महानदी का पुल नीचे होने के कारण बारिश अधिक होने पर इस पुल से आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। नदी के दोनों तरफ मिट्टी का कटाव अधिक होने पर यह मार्ग भी बंद हो जाता है। खितौली से उमरिया मार्ग स्थित पुल पर भी बारिश होने पर आवागनम अवरूद्ध होता है। मोटर वोट के सहारे लोगों को नदी पार करना पड़ती है। खितौली-चंदिया रोड करचुलियन में रपटा नीचे होने के कारण 1 घंटे की बारिश में ही रपटे से आवागमन बंद हो जाता है। यहां तैराक भी तैनात किए जाते है। बाणसागर के बैक वाटर से ग्राम कुदरी के कुछ आबादी, कुटेश्वर स्थित हरिजन बस्ती, गैरतलाई में दफाई बस्ती के लोग प्रभावित होते है। बाढ आने पर इन बस्तियों को खाली कराया जाता है। विजयराघवगढ़ से कांटी रोड पर आवागमन प्रभावित होता है। कचना नदी पुल नीचा है। पीडब्ल्यूडी के बैरीकेट्स लगवाए जाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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