कटनी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में वर्षा के अलावा सिंचाई के संसाधनों में वृद्धि नहीं हो सकी है। इससे किसान हर फसल सीजन में परेशान होते हैं लेकिन किसानों की समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है। वर्षा न होने से जिले के किसान खरीफ व रबी दोनों में किसान परेशान होते हैं। जिले में सिंचाई के संसाधनों में पर्याप्त वृद्धि नहीं हो पाई है। यहां पर सिंचाई व्यवस्था पुराने समय की ही काम कर रही है।

महत्वाकांछी नर्मदा नहर कार्य जिले के कुछ भागों में पूरा हुआ है लेकिन इससे सिंचित एरिया करीब 5 सौ हेक्टेयर तक ही पहुंचा है। आजादी के बाद जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा सिंचित एरिया अधिक नहीं बढ़ाया गया बस यही किया गया कि जो व्यवस्था अंगरेज बना कर गए थे। उन्हीं की मरम्मत और मेंटनेंस ही किया गया।

अंग्रेजों के समय बनाया गया जलाशय बहोरीबंद जलाशय ही जिले का सबसे बड़ा जलाशय है। जिले में जल संसाधन द्वारा की जाने वाली सिंचाई का 40 फीसद सिंचाई यही जलाशय करता है। उल्लेखनीय बात है कि इसकी सिंचाई क्षमता ही 20 हजार हेक्टेयर अंकित है लेकिन जिले में कुल सिंचाई क्षमता खरीफ में करीब 10 हजार हेक्टेयर और रबी में करीब 12 हजार हेक्टेयर ही है। नर्मदा नहर का इंतजार पिछले कई वर्षों से किसान कर रहे हैं ताकि उनकी सोई किस्मत जा सके लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

तालाब अंग्रेज छोड़ कर गए थे। उन्हीं की नहरें जल संसाधन दुरस्त नहीं करवा पाया। यही कारण है आज कहने के लिए जल संसाधन के पास सिर्फ 10 हजार हेक्टयेर ही सिंचाई क्षमता है। आजादी के बाद कृषि भूमि बहुत अधिक बढ़ गई लेकिन इसके बाद भी सिंचाई सुविधाएं नहीं बढ़ पाईं है।

इस विषय में जल संसाधन के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि नर्मदा के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के कारण जिले में छोटी कृषि सिंचाई योजनाएं नहीं बन पाईं। लोक सभा क्षेत्र में चुने गए जनप्रतिनिधि भी इस विषय में अधिक गंभीरता से नहीं सोच पाए।

1.50 लाख हेक्टेयर का रकबाः जिले में खरीफ का का कुल रकबा1.50 लाख हेक्टेयर में है। इसमें धान करीब 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर में बोई जाती है। वहीं दलहनी14 हजार तिलहनी 8 हजार में है। सोयाबीन 15 सौ हेक्टेयर में बोई जाती है। इसी प्रकार जिले में हर वर्ष 1 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। इसके अलावा दलहन और तिलहन की फसल बोई जाती है।

जिले में 89 जलाशयः जिले में कुल 89 जलाशय हैं। इनमें से 18 जलाशय ऐसे हैं जिन पर बड़ा कृषि क्षेत्र निर्भर है। बीते वर्ष करीब 8928 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की सिंचाई की गई थी। नर्मदा नहर के जिले में पूरा हो जाने के लिए समय सीमा 30 जून 2018 तक समय सीमा निर्धारित की गई है। किसानों के लिए इस प्रोजेक्ट के संबंध में बताया गया कि इस योजना के पूरा होने से जिले में दो लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होगी। इससे जिले में कृषि रकबा भी बढ़ेगा। किसानों को समय पर योजना से लाभांवित कराए जाने के लिए यह आवश्यक है कि समुचित प्रयास कर समय पर प्रोजेक्ट को पूरा कराना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब विभागीय अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि कार्य तेजी से किया जा रहा है। मार्च 2021 तक इस योजना को पूरा कर लिया जाएगा।

वर्जन

जिले में सिंचाई सुविधाएं किसानों के लिए मिल सकें। इसके लिए विभाग प्रयास करता है। नहरों की भी मरम्मत करवाई जाती है।

- जे पी बघेल, कार्यपालन यंत्री

Posted By: Nai Dunia News Network

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