सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी का मामला, चल रहा रंग- रोगन

रीठी। नईदुनिया न्यूज

आगामी दिनो में कायाकल्प टीम द्वारा अस्पतालों का निरीक्षण किये जाने की भनक जैसे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी के अमले को लगी तो पूरा का पूरा विभाग बदहाल अस्पताल की काया संभालने में जुट गया, ताकि अधिकारीयों को सब चकाचक नजर आये। टीम के आगमन को लेकर बीते दो-तीन दिनों से रीठी अस्पताल के अमले द्वारा खास तैयारियां की जा रहीं है। गंदगी से अटे पड़े अस्पताल की साफ-सफाई कराई जा रही है वहीं पूरे परिसर की रंग-पुताई का कार्य भी तेज गति से चल रहा है। इतना ही नही अधिकारीयों को चकाचक दिखाने के उद्देश्य से बदहाल पड़े वाटिका को भी संभाला जा रहा है और बैनर-पोस्टर लगाकर अस्पताल की काया बनाई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी प्रकार माह मे एक बार ऐसे ही अधिकारी रीठी अस्पताल पहुंचने लगे तो हो सकता है कि यहां पदस्थ प्रत्येक कर्मचारी भी इमानदारी से नौकरी करने लगे।

विष अधिनियम का पालन नहीं करने पर कड़ी सजा का प्रावधान

कटनी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अवैध और विषैली शराब निर्माण तथा अन्य प्रयोजनों में मेथानॉल और अन्य विषैले रसायन के उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्य शासन द्वारा अनेक ठोस व सख्त कदम उठाए गए हैं। गृह विभाग ने विष अधिनियम-1919 (केंद्रीय कानून) और मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित विष नियम-2014 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश सभी कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को जारी किए है। अब नियमों में अधिसूचित सभी प्रकार के विष पदार्थों के विक्रय के लिये जिला कलेक्टर से अनुज्ञप्ति प्राप्त करना बंधनकारी होगा। नियमों के उल्लंघन पर एक वर्ष की सजा होगी।

अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि जिला कलेक्टर द्वारा जारी अनुज्ञप्ति में विषैले पदार्थों के विक्रय स्थल, उनके भण्डारण की अधिकतम मात्रा, सुरक्षा उपाय, किनको विक्रय किया जा रहा है, विषैले पदार्थों के भंडारण करने की विधि, स्टॉक पंजी, विक्रय पंजी के संधारण की अनिवार्यता, विष को लेबल करने और परिवहन के समय किए जाने वाले उपाय का उल्लेख होगा। अनुज्ञप्ति की शर्तों का पालन करना वैधानिक रूप से अनिवार्य रहेगा। अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजौरा ने बताया कि जिला कलेक्टर परिसरों की जांच के लिए सर्च वारंट जारी कर सकेंगे। एएसआई और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी स्टॉक और विक्रय पंजी की जांच कर सकेंगे। विष अधिनियम या विष नियम का पालन नहीं करने पर एक वर्ष की सजा का प्रावधान है। प्रदेश में विगत दिनों अवैध शराब निर्माण में औद्योगिक और अन्य प्रयोजनों में इस्तेमाल होने वाले मेथानॉल और अन्य विषैले रसायन आदि का उपयोग होने से शराब विषैली हो गयी थी और जन हानि हुई थी। मुरैना, उज्जैन और मंदसौर में जहरीली शराब में मेथानॉल की मात्रा पायी गयी थी। इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य शासन द्वारा अनेक ठोस कदम उठाए गए हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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