कटनी/रीठी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नौ अगस्त को मनाये जाने वाले पैगंबर ए हरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत का मातमी पर्व मोहर्रम को लेकर रीठी में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इमाम बाड़ों में ताजिया बनना भी शुरू हो चुका है। वहीं नगर में दिन-रात शहीदी कलाम भी गूंज रहे हैं। देखा गया कि वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार रीठी नगर के सिंघैया मोहल्ला में स्थित गफ्फार खान के बड़ा इमाम बाड़ा में हिंदू और मुस्लिम धर्म के लोग मिलकर ताजिये का निर्माण कर समूचे देशभर में हिंदू-मुस्लिम कौमी एकता की अनूठी मिसाल पेश करते आ रहे हैं, जो आज भी कायम है।

105 साल पुरानी बाबा की दरगाहः बताया गया कि रीठी नगर के सिंघैया मोहल्ला स्थित गफ्फार खान के बड़ा इमाम बाड़ा में ताजिया शरीफ 105 वर्ष पहले से बनता आ रहा है। गफ्फार खांन ने बताया कि पहले मरहूम लल्लू खां के द्वारा ताजिया शरीफ बनाया जाता था और सवारी शेख याकूब की चलती थी, जो करीब 60 वर्षों तक चली। इसके बाद से अब सभी मुस्लिम व हिन्दू भाई मिलकर ताजिया शरीफ बनाते हैं और सवारी गफ्फार खान, अजीज खान पप्पू, सगीर खान की एकसाथ चलती है। जो इमाम बाड़ा से चलकर नगर का सफर करती हुई कर्बला तक जाती है। देखा गया कि बाबा की दरगाह पर धर्म और मजहब की कोई दीवार नहीं होती इस कहावत को चरितार्थ करते हुए यहां पर सभी कौम के लोग आपस में मिलजुल कर बड़ी ही शिद्दत व श्रृद्धा के साथ ताजिया शरीफ का निर्माण कर रहे हैं।

मुनीर चच्चा व झिरहाई अखाड़े में भी बन रहा ताजियाः रीठी नगर के रेल्वे स्टेशन रोड स्थित मुनीर चच्चा के अखाड़े में भी परंपरानुसार ताजिया शरीफ का निर्माण किया जा रहा है। मुनीर चच्चा के अखाड़े में भी कई वर्ष पहले से ताजिया शरीफ बनता आ रहा है। बताया गया कि मुनीर चच्चा के इमाम बाड़ा से असलम बाबा, कासिम बाबा, मकबूल बाबा की सवारी चलती है। वहीं झिरहाई स्थित इमाम बाड़ा में भी ताजिया शरीफ बनना शुरू हो गया है।

सलीम खान के इमाम बाड़ा में भी तैयारियां तेजः नगर के न्यू कालोनी खेल मैदान के समीप स्थित सलीम खान के बड़ा इमाम बाड़ा में भी मातमी पर्व मोहर्रम को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बताया गया कि सलीम खान के इमाम बाड़ा से सलीम बाबा की सवारी चलती है। शहादत के पर्व मोहर्रम की पांच तारीख याने की गुरुवार को रात्रि 9 बजे नगर के सभी इमाम बाड़ों से फूलों से सजी हुई टिपारीयां निकली। जो प्रमुख मार्गों पर गस्त करते हुए अशोक मांझी के निवासी स्थित तकिया पहुंची जहां हाजरी देने के बाद टिपारियो का जुलूस पुनः इमाम बाड़ा पहुंचकर समाप्त हुआ। वहीं पर्व की सात तारीख याने कि रविवार की रात्रि को भी सभी सभी इमाम बाड़ों से सवारी उठेंगी और नगर का सफर करती हुई तकिया हाजरी लगाने पहुंचेगी।

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