उमरिया/ कटनी। कटनी जिले के रेगुलर फारेस्ट के बरही वन परिक्षेत्र के पिपरिया कलां बीट में कुएं में गिरे करीब 11 महीने के बाघ शावक को साढ़े पांच घंटे रेस्क्यू के बाद शाम लगभग 4.30 बजे कुएं से निकाल लिया गया। इस दौरान 70 लोगों की टीम लगातार मशक्कत करती रही। बाघ शावक को बेहोश करने के बाद जाल में भरकर बाहर निकाला गया और पिंजरे में डालकर बाघ शावक को झिरिया नर्सरी की तरफ ले जाया गया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है।

डॉक्टर का करते रहे इंतजार

रीवा के मुकुंदपुर से आए डॉ. राजेश सिंह ने बाघ शावक को बेहोश किया। बांधवगढ़ के डॉक्टर नितिन गुप्ता किसी जरूरी काम से भोपाल गए हुए थे। इसके कारण रीवा मुकुंदपुर से डॉक्टर बुलाना पड़ा। डॉक्टर के आने से पहले कुछ नहीं हो सकता था, इसलिए सिवाय इंतजार के कोई रास्ता भी वनविभाग के अधिकारियों के पास नहीं था।

शरीर में आई चोट

बाघ शावक को काफी चोट भी आई हुई थी। यही कारण है कि कुएं से निकालने के बाद इलाज के लिए ले जाया गया है। उसके शरीर के घाव को ठीक करने के बाद ही उसे जंगल में छोड़ा जाएगा। बेहोशी की हालत में ही डॉक्टरों ने बाघ शावक का परीक्षण किया जिसमें बाघ शावक के पिछले पैरों की तरफ और सिर में घाव हैं। बताया जा रहा है कि कुएं में गिरने के दौरान नीचे बड़े पत्थरों से टकराने के कारण यह चोट लगी होगी।

दो दिन पहले गिरा कुएं में

बाघ शावक कुएं में दो दिन पहले गिरा था। वन विभाग के अधिकारियों को मंगलवार की सुबह पिपरिया कला के कोटवार ने बताया था कि बाघ शावक कुएं में गिरा हुआ है।

बाघिन की दहाड़ से डरे हुए थे ग्रामीण

गांव के लोगों ने सोमवार की शाम को ही बाघ शावक को कुएं में देख लिया था। लेकिन डर के मारे किसी ने इस बात की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को नहीं दी थी। रविवार की शाम से ही बाघिन कुएं के आसपास मंडरा रही थी और दहाड़ रही थी। इस दौरान कोई भी कुएं की तरफ नहीं गया।

सोमवार की शाम लगभग 4 बजे के आसपास जब चरवाहे वहां से निकल रहे थे तो उन्हें कुएं के अंदर से बाघ शावक के होने की आवाज सुनाई दी। जब लोगों ने कुएं के अंदर झांक कर देखा तो बाघ शावक को देखकर डर गए।