खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। 31 अगस्त से गणेशोत्सव की शुरुआत होने वाली है। इसके पहले बाजार में मूर्तियां बनाने का काम शुरू हो चुका है। इस बार शहर में मूर्ति बनाने वाले अधिकांश परिवार मिट्टी से मूर्ति निर्माण कर रहे हैं। कई परिवार प्लास्टर आफ पेरिस से बनी मूर्तियां ही बना रहे हैं जबकि शासन ने छोटी मूर्तियां पीओपी से बनाने पर रोक लगाई है। इसके अलावा कई लोग मूर्ति बनाने का काम नहीं करते लेकिन बाहर से मूर्तियां लाकर बेचते हैं। सुंदर दिखने वाली यह मूर्तियों पर ऊपर से मिट्टी की परत वाली होती है। अधिकांश मूर्तियों में अंदर पीओपी का इस्तेमाल होता है। जिससे ग्राहक भी समझ नहीं पाते।

इन शहरों से पहुंचती है पीओपी की मूर्तियां

शहर में बुरहानपुर, इंदौर, हरदा आदि शहरों से बड़ी मात्रा में पीओपी की मूर्तियां उत्सव के एक दो दिन पहले बाजार में बिकने के लिए आती है। इनमें अधिकांश ऐसे लोग होते हैं जो मूर्तियों को खरीदकर बेचते हैं।

यहां तैयार होती है सभी मूर्तियां

कुम्हारबेड़ा, कुम्हार मोहल्ला, मोघट रोड, इंदौर रोड, राम नगर, आनंद नगर, माता चौक।

पीओपी से होता है जल प्रदूषण

पीओपी पावडर कैल्शियम सल्फेट व जिप्सम के रूप में जाना जाता है। इसमें पानी मिलते ही यह ठोस आकार में ढलता है। शुद्धि के रूप में एस्बेस्टस, सिलिका हो सकते हैं। ये दोनों स्थायी रूप से फेफड़ों को क्षति पहुंचते हैं। इसमें सल्फर, जिप्सम, फास्फोरस व मैग्नीशियम जैसे रसायन भी रहते हैं। जिनसे पानी भी पूरी तरह प्रदूषित होता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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