खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बारिश की वजह से चारखेड़ा में बैकवाटर का लेवल बढ़ने लगा है। फिल्टर प्लांट के इंटकवेल में पानी दूसरे पोर्ट तक आ पहुंचा है। हालांकि पानी का लेवल बढ़ने के बाद भी विश्वा कंपनी द्वारा नर्मदा जल की आपूर्ति महज दो मोटरपंप चलाकर की जा रही है। इसका कारण पानी में मटमैलापन (टर्बिडिटी) अधिक होना बताया जा रहा है।

शहर की जल वितरण व्यवस्था फिलहाल पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है जबकि चारखेड़ा में पानी का लेवल लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में यहां वाटर लेवल 248.7 मीटर बताया जा रहा है। जबकि करीब एक महीने पहले वाटर लेवल 245.7 मीटर था। तीन मीटर तक जलस्तर बढ़ने से पानी दूसरे पोर्ट तक आ गया है। बावजूद इसके विश्वा कंपनी शहर में पर्याप्त जलापूर्ति नहीं कर पा रही है। कंपनी के इंजीनियरों का कहना है कि बैक वाटर में पांच हजार यूएनटी तक टर्बिडिटी (मटमैलापन) है। जबकि फिल्टर प्लांट की क्षमता केवल दो हजार यूएनटी तक टर्बिडिटी वाले पानी को साफ करने की है। ऐसे में केवल दो ही मोटरपंप चलाकर पानी छोड़ा जा सकता है। विदित हो कि करीब डेढ़ महीने पहले चारखेड़ा में बैक वाटर का लेवल डाउन होने के कारण इंटकवेल में तीसरे पोर्ट तक पानी पहुंच गया था। ऐसा पहली बार हुआ जब नीचे की ओर तीसरे पोर्ट से पानी लेने में विश्वा कंपनी को मशक्कत करनी पड़ी थी। तीसरे पोर्ट से गाद हटाने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन तक के अमले को जूझना पड़ा था। तब कहीं जाकर कुछ हद तक शहर में नर्मदा जल की आपूर्ति शुरू हो सकी थी। वर्तमान स्थिति देखें तो दो मोटरपंप चलाकर विश्वा कंपनी द्वारा दिया जा रहा पानी भी लोगों के लिए पीने योग्य नहीं है। मटमैला पानी आने के कारण लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

टैंकरों से हो रही है जलापूर्ति

वर्तमान में लगभग 15 एमएलडी नर्मदा जल का वितरण शहर में हो रहा है। जबकि शहर को लगभग 30 एमएलडी पानी की जरूरत प्रतिदिन की है। नर्मदा जल का वितरण पर्याप्त नहीं होने के कारण नगर निगम को टैंकरों से प्रभावित क्षेत्रों में पानी देना पड़ रहा है। दो दर्जन से अधिक टैंकर अनुबंधित कर शहर में जलापूर्ति की जा रही है। इसके अलावा सुक्ता की लाइन से भी पानी लिया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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