सुमित अवस्थी, खंडवा (नईदुनिया)। रेलवे ट्रैक पर ट्रेन को तो सभी ने दौड़ते देखा होगा, लेकिन सनावद-खंडवा गेज कन्वर्जन के दौरान ट्रैक पर हॉपर (बड़ा डंपर) दौड़ रहा है। तेज और सुविधाजनक तरीके से निर्माण के लिए यह अनोखा प्रयोग किया है। इसमें रबर के टायर की जगह लोहे के पहिए लगे हुए हैं। इसकी मदद से ट्रैक पर गिट्टी बिछाई जा रही है।

इस काम में दो डंपर लगे हुए हैं। खंडवा से सनावद के बीच 56 किमी के मेन ट्रैक और नौ किमी के बायपास ट्रैक का काम चल रहा है। 45 किमी का काम पूरा हो गया है। अप्रैल तक मथेला-निमाड़खेड़ी और मई तक निमाड़खेड़ी-सनावद तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। खंडवा जंक्शन पर प्लेटफॉर्म के हाईलेवल होने और यार्ड निर्माण में करीब डेढ़ साल में होगा।

100 मजदूरों का काम करता है 'हॉपर'

रेलवे ट्रैक पर वाहन चला रहे श्याम सिरसाटे ने बताया कि 'हॉपर' 100 मजदूरों के बराबर काम करता है। इसमें लोहे के पहिए ग्वालियर से बनवाए हैं। एक बार में 20 टन से अधिक गिट्टी को ले जा सकता है। हाइड्रोलिक ट्रॉली की मदद से ट्रैक पर दौड़ते हुए गिट्टी बिछाता है। 40 किमी प्रतिघंटे तक की रफ्तार से दौड़ने वाले इस 'हॉपर' का स्टेयरिंग लॉक रहता है।

गेज कन्वर्जन को लेकर ये भी जान

- सनावद से अहमदपुर खैगांव और यहां से मथेला तक पहले चरण में ट्रैक बन रहा है।

- ट्रैक से खंडवा के सिंगाजी थर्मल पॉवर और सनावद के सेल्दा थर्मल पॉवर जुड़ेंगे।

- ट्रैक पर जून 2019 से कोयले की ट्रेनें दौड़ेंगी, खंडवा तक ट्रेन करीब डेढ़ साल बाद आएगी।

- चार राज्यों को जोड़ने वाले जयपुर-कांचीगुड़ा ट्रैक का एक हिस्सा खंडवा-सनावद ट्रैक।

- एक जनवरी 2017 को अकोला से सनावद ब्रिटिशकालीन ट्रैक पर दौड़ी थी आखिरी पैसेंजर।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local