खंडवा से सुमित अवस्थी। छोटी सी गाड़ी लुढ़कती जाए वो म बठी संजा बाई, तमारा सासरा से हत्थी भी आयो, घोड़ो भी आयो, पालकी भी अई, संजा तू थारे घर जा... ऐसे ही लोकगीतों से गूंजता हुआ पर्व है संजाफूली। आधुनिकता और भागदौड़ के इस दौर में भी संजाफूली ने निमाड़ी लोककला और गीतों को जीवंत रखा है। श्राद्धपक्ष के दौरान सोलह दिन तक मनाए जाने वाले इस पर्व में बालिकाएं और अविवाहित युवतियां दीवारों पर लोकचित्र के माध्यम से संजा बनाती हैं। नियमित पूजा व आरती भी की जाती है। खंडवा सहित निमाड़-मालवा अंचल के कई क्षेत्रों में संजा का उत्सव मनाया जा रहा है।

शहर के मोहल्ले हो या गांव, संजा का पर्व उत्साह और उमंग से मनाया जाता है। मान्यता है कि संजा गीत गाने के दौरान कन्याएं अपने मन की बात संजा माता से कहती हैं और वे मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। पितृमोक्ष अमावस्या पर संजा का विजर्सन किया जाता है। इस दौरान बालिकाएं दूल्हा और दुल्हन बनती हैं और भजन करते हुए घाटों पर संजा का विसर्जन करने पहुंचती हैं।

गाय के गोबर से बनाते हैं संजा : संजा दीवारों पर गाय के गोबर से बनाई जाती है। पहले गोबर से आकृतियां बनाई जाती हैं, फिर विभिन्ना रंग के फूल- पत्तियों से सजाकर शाम के समय पूजनआरती की जाती है। बालिकाएं और अविवाहित युवतियां संजा बनाती और आरती करती हैं। विवाह होने के बाद युवतियां संजा पर्व का उद्यापन करने मायके भी आती हैं।

आधुनिकता का पड़ा असर, पत्ती की जगह चमकीले कागज : आधुनिकता का कुछ असर भी पर्व पर पड़ा है। फूलों की पत्तियों की जगह अब रंगीन चमकीले कागजों से भी इन्हें सजाया जाने लगा है। इसके साथ ही अब बाजारों में भी कागजों पर बनी तैयार संजा मिलती हैं। इसे दीवारों पर आसानी से चिपका दिया जाता है।

पर्व को सहेजने के लिए हो रहे प्रयास

आधुनिकता के बीच पर्व को सहेजने के लिए प्रयास भी हो रहे हैं। गत वर्षों से शहर के शासकीय कॉलेजों और संगठनों ने सामूहिक संजा बनाने के आयोजन शुरू किए हैं। इनमें खंडवा के संगीत व ललित कला कॉलेज और गर्ल्स डिग्री कॉलेज सहित अन्य लोककला संस्थाएं शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में युवा एकत्रित होकर संजा बनाते हैं और पर्व के संरक्षण का संकल्प भी लेते हैं।

संजा पर्व के दौरान गाए जाने वाले गीत

- संजा तू थारा घर जा कि थारी मां मारेगी के कूटेगी

- संजा की जी संजा के भेजो तो करां

- संजा की आरती रई रमजो, रई रमजो

- अब तो जाओ संजा बई सासरे, हम तो नी जावा दादाजी सासरे

- छोटी सी गाड़ी लुढ़कती जाए वो म बठी संजा बाई, चूड़लो चमकाता जाय, बिछिया झमकाता जाय, नथनी झलकाता जाय।