खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। विदिशा के लटेरी गांव के जंगल में वनकर्मियों द्वारा की गई फायरिंग में एक आदिवासी युवक की मौत के मामले में पुलिस ने डिप्टी रेंजर निर्मल अहिरवार पर हत्या का केस दर्ज करने से वन अमले में आक्रोश है। कार्रवाई के विरोध में जिले के वन अधिकारी और कर्मचारियों ने 120 राइफल व 11 रिवाल्वर जमा पर वापस जमा कर दी। साथ ही इस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी कर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

वन मंडलाधिकारी सामान्य वन मंडल कार्यालय पर मंगलवार को मप्र वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के आव्हान पर रेंजर सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारियों का जमावड़ा रहा। जिले के 11 रेंजर कार्यालय से बड़ी संख्या में सभी वनकर्मी एकत्रित हुए। सभी लोग अपने साथ विभाग द्वारा दी गई राइफल और रिवाल्वर लेकर आए थे। एक तरह से 11 रेंजर 11 रिवाल्वर और शेष 120 से अधिक कर्मचारी राइफल लिए हुए थे। सभी अपने हथियार मुख्य वन संरक्षक देवांशु शेखर के कक्ष में लेकर पहुंचे। उन्होंने इन हथियारों को उन्हें सौंप दिया। मध्यप्रदेश फारेस्ट रेंजर एसोसिएशन के जिला प्रवक्ता मुकेश कुमार डुडवे ने बताया कि जिला कार्यालय में हमने अपनी राइफल और रिवाल्वर जमा कर दी है। लटेरी में जो घटना हुई उसमें 197 सीआरपीसी की धारा का उल्लंघन हुआ है। बिना जांच के कर्मचारी पर प्रकरण दर्ज कर जेल भेज दिया। साथ ही अब तक वन विभाग के स्क्वाड को सशस्त्र बल घोषित नहीं किया गया है। इससे सभी वन अधिकारी और कर्मचारियों में आक्रोश है। इसके बाद भी अगर सुनवाई नहीं होती है तो संगठन के आव्हान पर आगामी कदम उठाया जाएगा।

वन कर्मचारी संघ के निलेश त्यागी का कहना है कि जब हमें हथियार चलाने और रखने की अनुमति ही नहीं दी गई है तो ऐसे हथियारों का हम क्या करेंगे। यह हथियार हमें वन और वन प्राणियों की सुरक्षा के लिए दिए गए थे। विदिशा में जो घटना हुई है। उसमें वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग की थी। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत गोली लगने से हो गई। इस मामले में शासन ने मृतक को 25 लाख रुपये दिए। इधर वनकर्मी पर प्रकरण दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। इसकी हम घोर निंदा करते हैं।

इन चार मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

वन मंडल कार्यालय से वनकर्मियों ने कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली। यहां कर्मचारियों ने जमकर नारे लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद की। यहां अपनी चार मांगों को लेकर तहसीलदार नितिन न चौहान को ज्ञापन सौंपा। वनकर्मियों ने जंगल में मैदानी वन कर्मचारियों को वन बल घोषित किया जाए। आइपीसी के तहत वनक्षेत्रों में घटित अपराधों को रोकने की शक्तियां प्रदान की जाए। सीआरपीसी की धारा 197 के अनुसार गोली चलाने की घटना में वन कर्मचारियों के विरुद्ध की जाने वाली एफआइआर में गिरफ्तारी के पहले मजिस्ट्रियल जांच करवाई जाए। इसी तरह की अन्य मांगें भी कीं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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