फोटो 05केएचए 08 नगर निगम चुनाव में महापौर पद की दावेदार तीन विभिन्ना दलों की महिला महापौर प्रत्याशी। सौजन्य इंटरनेट

- इस बार कोई भी पार्टी जीते महिला ही करेंगी नगर सरकार का नेतृत्व

- छठी परिषद में खत्म हो जाएगी पुरुष महापौर की बढ़त

खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम की छठी परिषद गठन के लिए हो रहे चुनाव में महापौर पद के लिए किसी भी प्रत्याशी या पार्टी को बहुमत मिले नगर सरकार का नेतृत्व महिला ही करेंगी। यहां तीसरी बार महापौर पद पर महिला काबिज होने से इस पद पर पुरुष महापौर की बढ़त भी खत्म हो जाएगी। निगम के इतिहास में अब तक बनी पांच परिषदों में दो बार महिलाएं तो चार बार पुरुष नगर सरकार का नेतृत्व कर चुके हैं। परिषद की पहली अध्यक्ष की बागडोर भी महिला के हाथों में रही है।

खंडवा नगर निगम की सबसे पहली परिषद का नेतृत्व महिला महापौर का मिला। इस परिषद में महापौर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था। ऐसे में कांग्रेस से अणिमा उबेजा अप्रत्यक्ष प्रणाली अंतर्गत पार्षदों के बीच से चुनी गई थी। इसके बाद से महापौर के चुनाव लगातार प्रत्यक्ष रूप से हो रहे हैं। दूसरी परिषद में सामान्य वर्ग पुरुष से उद्योगपति व समाजसेवी ताराचंद्र अग्रवाल भाजपा से महापौर चुने गए। आरक्षण प्रक्रिया में तीसरी परिषद के लिए महापौर पद पिछड़ा वर्ग पुरुष के लिए तय होने से संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता व मीसाबंदी वीरसिंह हिंडोन ने भाजपा की ओर से परिषद का नेतृत्व किया। निगम की चौथी परिषद के नेतृत्व के लिए हुए आरक्षण में फिर सामान्य वर्ग से महिला को अवसर मिला। इसके चलते भाजपा के कद्दावर आदिवासी नेता और तत्कालीन खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री विजय शाह की पत्नी भावना शाह ने नगर सरकार चलाई।

निगम की पांचवीं परिषद की बागडोर एक बार फिर सामान्य वर्ग पुरुष को मिलने से भाजपा जिलाध्यक्ष रहे सुभाष कोठारी महापौर बने। इस प्रकार अब तक नगर निगम की पांच परिषदों में तीन बार पुरुष और दो बार महिला महापौर काबिज हो चुकी है। इस बार महापौर पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने से भाजपा से अमृता अमर यादव और कांग्रेस से आशा अमित मिश्रा मैदान में है। इनके भाग्य का फैसला बुधवार को ईवीएम में कैद हो जाएगा। परिणाम चाहे किसी के भी पक्ष में आए। नगर निगम की कमान महिला ही संभालेंगी यह तय है।

पहली परिषद अध्यक्ष भी महिला

सन 1995 में अस्तित्व में आई नगर निगम की पहली परिषद में अध्यक्ष का प्रविधान नहीं था। तब महापौर और उपमहापौर की व्यवस्था थी। इसके बाद हुए बदलाव में महापौर प्रत्यक्ष और परिषद अध्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से पार्षदों में से चुनने की शुरुआत हुई। महापौर की तरह ही खंडवा नगर निगम परिषद का संचालन करने का सबसे पहला मौका वर्ष 2000 में भाजपा की महिला पार्षद अनिता गुप्ता को मिला। उनके बाद वर्ष 2005 में बनी तीसरी परिषद में अध्यक्ष भाजपा से योगेंद्र जोशी और वर्ष 2010 में चौथी परिषद में भाजपा पार्षद अमर यादव ने अध्यक्ष की हैसियत से परिषद का संचालन किया। इस बार उन्होंने महापौर के लिए अपनी पत्नी अमृता यादव को मैदान में उतारा है। नगर निगम की वर्ष 2015 में गठित पांचवीं परिषद का नेतृत्व भी भाजपा के हाथों में ही रहा। पार्षद रामगोपाल शर्मा गोपी भैया को परिषद अध्यक्ष पद पर रहे। ऐसे में परिषद अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस को एक बार भी मौका नहीं मिला है।

महापौर की दौड़ में शामिल महिलाएं

नगर निगम की छठी परिषद में महापौर पद के लिए मैदान में पांच महिलाएं है। इनमें भाजपा से अमृता यादव, कांग्रेस से आशा मिश्रा, आप से वंदना सोनी, एआइएमआइएम से कनीज बी और निर्दलीय की हैसियत में शिरीन तालिब चुनाव लड़ रही है।

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बुलडोजर पर सवार महापौर

फोटो 05केएचए 09 नगर निगम की पहली महापौर अणिमा उबेजा बुलडोजर का स्टेयरिंग थामे हुए। सौजन्य उबेजा परिवार

नगर निगम की पहली महापौर अणिमा उबेजा के कार्यकाल में खंडवा को स्थानीय शासन विभाग की ओर से जेसीबी मशीन (बुलडोजर) मिली थी। जो आज तक निगम का सहारा बनी हुई है। इसे नगर निगम के वाहन बेडे में शामिल करने के पूर्व तत्कालिन महापौर उबेजा ने पूजन उपरांत स्वयं स्टेयरिंग थामा था। उस समय खींचा गया यह फोटो पूर्व महापौर उबेजा ने स्वयं उपलब्ध करवाया है।

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