खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कैदियों से ओवर लोड अंग्रेजों के जमाने की शहीद जननायक टंट्या भील जेल को अस्पताल की दरकार है। जेल में कैदियों के लिए अस्पताल नहीं है। अचानक किसी के बीमार पड़ने पर उसे सीधे जिला अस्पताल लेकर आना पड़ता है। जेल में डॉक्टर का पद भी खाली पड़ा हुआ है। कुछ माह पहले यहां पदस्थ डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से अब जेल की स्वास्थ्य सेवाएं जिला अस्पताल के भरोसे चल रही हैं। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर महिने में कुछ दिन आकर यहां कैदियों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं।

शहीद जन नायक टंट्या भील जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं। बुरहानपुर में जेल नहीं होने से वहां के कैदियों का भार भी खंडवा जेल पर पड़ रहा है। जेल में कैदियों को रखने की क्षमता करीब 208 है, लेकिन फिलहाल में दोगुनी से भी अधिक संख्या में कैदी रह रहे हैं। यहां करीब 481 कैदी रह रहे हैं। इसका असर जेल की व्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है। जेल में स्वास्थ्य सेवाओं की दरकार है। मुख्य रूप से जेल में अस्पताल नहीं है। जेल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। अस्पताल की समस्या यहां बनी हुई है। तबीयत खराब होने पर कैदियों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। पैरा मेडिकल स्टॉफ भी यहां पूरा नहीं है। केवल एक महिला नर्स यहां पदस्थ है। उस पर ही जेल का भार है।

- जेल में अस्पताल होना अति आवश्यक है। अस्पताल होने से बीमार कैदियों को उपचार करवाने में सहूलियत होगी। जेल में अस्पताल बने इसके लिए जेल मुख्यालय को लिखा गया है। -ललित दीक्षित, प्रभारी जेल अधीक्षक

Posted By: Nai Dunia News Network

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