सुमित अवस्थी, खंडवा। खंडवा स्थित प्राचीन विट्ठल मंदिर में 137 सालों से नाम संकीर्तन की अनूठी परंपरा चल रही है। यहां हर साल देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा तक अखंड नाम संकीर्तन होता है। ढोल, तबले और हारमोनियम की धुन पर मंडलियां भजन गाती हैं। नाम सप्ताह से पहले पान-सुपारी के साथ भगवान विट्ठल -रुकमणि को निमंत्रण भेजा जाता है।

कांकड़ा आरती से शुरू होने वाले भजनों का सिलसिला दिन-रात जारी रहता है। गुरु पूर्णिमा के अगले दिन पंढरीनाथ भगवान की शोभायात्रा के साथ उत्सव का समापन होता है। मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित महाराष्ट्र के विभिन्ना क्षेत्रों से भी यहां मंडलियां भजन करने आती हैं। सात दिनों में यहां 100 से अधिक मंडलियां पहुंचती हैं। सात दिनों तक दर्शन-पूजन और भजन गाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

ऐसे शुरू हुई परंपरा

मंदिर के पुजारी राम आष्टेकर ने बताया कि सन् 1882 में सद्गुरु स्वामी जयपुर से पैदल चलकर श्रीदत्त भगवान की मूर्ति खंडवा लाए थे। जिसे विट्ठल मंदिर में स्थापित किया गया। तब से लगातार नाम सप्ताह उत्सव आयोजित किया जा रहा है। नाम सप्ताह के लिए मंदिर के पुजारी प्रतिवर्ष आषाढ़ अमावस पर भगवान विट्ठल -रुकमणि , भगवान दत्तात्रेय, सच्चिदानंद महाराज व गुरु महाराज के नाम चार पत्र लिखते हैं। इसमें पान-सुपारी रखकर भगवान को सौंपा जाता है। मंदिर के पुजारी परिवार ने प्रतिवर्ष लिखे जाने वाले पत्र संभालकर रखे हुए हैं।

होती है कांकड़ा आरती, हिंदी, मराठी व निमाड़ी में भजन

मंदिर में देवशयनी एकादशी पर सुबह 6.30 बजे कांकड़ा आरती होती है। इसके बाद भजनों का सिलसिला शुरू होता है, जो गुरु पूर्णिमा तक जारी रहता है। यहां हिंदी, मराठी और निमाड़ी में भजन करने के लिए दूर-दूर से मंडलियां पहुंचती हैं।

पंढरपुर, द्वारका और वृंदावन से आया श्रृंगार

नाम सप्ताह के लिए मंदिर को विशेष तौर पर सजाया जा रहा है। भगवान विट्ठल व माता रुकमणी का सात दिनों तक पंढरपुर, द्वारका, वृंदावन, मथुरा और कोल्हापुर की सामग्रियों से श्रृंगार किया जाएगा।

समापन पर पालकी

नाम सप्ताह के समापन पर शहर में पंढरीनाथ महाराज की पालकी निकाली जाती है। पुजारी श्याम आष्टेकर ने बताया कि नाम सप्ताह के समापन पर शहर में भगवान पंढरीनाथ महाराज की पालकी को भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान भी शहर में जगह-जगह आरती व भजन होते हैं और प्रसाद बांटा जाता है। मंदिर में मटकी फोड़ का आयोजन होता है।