MP News: खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पिछले दो वर्षा के दौरान बर्बाद हुई किसानों की फसलों का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। फसल बीमा कराने वाले किसान भी स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। प्रभावित किसान अब भी शासन से राशि मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जिले में वर्ष 2019-20 में अतिवृष्टि की वजह से किसानों की सोयाबीन फसल नष्ट हुई थी। तत्कालीन कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल ने स्वयं खेतों में पहुंचकर फसलों की नुकसानी का जायजा लिया था। पटवारियों के माध्यम से खेतों में सर्वे भी कराया गया था लेकिन इस सर्वे के बाद न तो किसानों को राहत राशि मिली और न ही फसल बीमा योजना का लाभ मिल सका। इसी तरह वर्ष 2021 में प्याज की फसल नष्ट होने पर भी किसानों ने कलेक्टर से सर्वे कराने की गुहार लगाई थी।

सोयाबीन की फसल हुई थी बर्बाद

इसके बाद सर्वे तो हुआ लेकिन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किसानों को किसी तरह की राहत राशि नहीं दी गई। फसलों की नुकसानी पर बीमा और राहत राशि नहीं मिलने से किसान मायूस नजर आ रहे हैं। ग्राम सेगवाल के किसान प्रीतम सिंह गजराज सिंह का कहना है कि वर्षा के दौरान दो एकड़ खेत में कटी हुई फसल नष्ट हो गई थी। ग्राम बावड़िया काजी के किसान प्रेमलाल पटेल का कहना है कि वर्षा से खेत में पानी भर जाने के कारण सात एकड़ में लगी सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई थी। जब सर्वे हुआ था तो उम्मीद जगी थी कि सरकार द्वारा आर्थिक मदद की जाएगी लेकिन एक रुपया भी नहीं मिला।

किसान आंदोलन करने की तैयारी में

ग्राम सिरपुर के किसान दीपक पटेल ने कहा कि वर्षा के कारण चार एकड़ में लगी सोयाबीन की फसल नष्ट हुई थी पटवारियों ने सर्वे भी किया था लेकिन कोई राहत राशि नहीं मिली। भारतीय किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष सुभाष पटेल का कहना है कि शासन द्वारा यदि प्रभावित किसानों के खेतों में सर्वे कराया गया था तो नुकसानी पर राहत राशि दी जानी चाहिए। राहत नहीं मिलने के कारण किसान फसल बीमा से भी वंचित हो जाता है। प्रभावित किसान स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। यदि किसानों को राहत राशि नहीं दी जाती है तो आगामी दिनों में आंदोलन किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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