खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। खंडवा की एक विशेषता है कि यहां अपनत्व बहुत है। यहां जो भी बाहरी व्यक्ति आया वह खंडवा का होकर रह गया। यह कस्बे से नगर बना है। इसका वैभवशाली इतिहास रहा है। यहां पर हमेशा से ही एक-दूसरे का सहयोग करने की भावना प्रबल है। आज शहर का विकास हो रहा है यह अच्छी बात है लेकिन विकास बेतरतीब व अव्यवस्थित हो यह अच्छी बात नहीं। नई कालोनियों को स्वीकृति देते समय आधुनिक सुविधाओं व संसाधनों के मानकों को आधार बनाकर ही स्वीकृति प्रदान की जाए। नया निर्माण अगले 50 वर्ष की आवश्यकता को देखकर करना जरूरी है। मतलब जनसंख्या बढ़ेगी तो उसके अनुसार पानी की आवश्यकता, यातायात का दबाव होने पर सड़कों की स्थिति, स्कूल-कालेजों की आवश्यकता आदि बातों को ध्यान में रखना जरूरी है। अभी केवल वर्तमान को देखकर कार्य हो रहा है। भोपाल में नए भोपाल का निर्माण व्यवस्थित हुआ है जबकि खंडवा में ऐसा नहीं हो रहा। इंदौर स्वच्छता में नंबर वन आ रहा है क्योंकि वहां पर हर नागरिक जागरूक है। इस तरह की सफलता के लिए नागरिक बोध सबसे जरूरी है।

इस तरह से लौटेगा शहर का गौरवः खंडवा की पहचान सांस्कृतिक नगर के रूप में प्राचीनकाल से रही है। यह पुराणकाल का उल्लेखित नगर है व खांडव वन का महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है। नगर की पहचान को बनाए रखने के लिए सभी पुराने व पुरातात्विक महत्व के स्थलों का क्रमबद्ध रूप से संरक्षण व उत्खनन किया हो। यह एक दिन में नहीं होगा। इसके लिए चार से पांच वर्ष की योजना बनाना जरूरी है। एक-एक स्थल को संरक्षित रखकर अतिक्रमण मुक्त कराया जाए व फिर सौंदर्यीकरण भी कराया जाए।

चारों कुंड का हो पुनर्निर्माणः खंडवा की चारों दिशाओं में कुंड हैं। पूरब में सूरज कुंड, पश्चिम में पद्म कुंड, उत्तर में रामेश्वर कुंड व दक्षिण में भीम कुंड। इनके पुनर्निर्माण का कार्य हो। उसकी गाद निकाली जाए व पुराने महत्व के रूप में स्थापित किया जाए। इससे दो लाभ होंगे। पहला तो इनका पुराना वैभव लौटेगा व दूसरा जल भराव के कारण जल की समस्या हल होगी। इसे इस रूप में बनाया जाए जिसके जल का उपयोग हो सके। बगीचे बनाए जाए जिसकी देखरेख का जिम्मा सेवानिवृत्त लोगों को दी जाए।

पत्रकारिता का बने एक प्रतिष्ठानः नगर के एक पितृ पुरुष कवि माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता की एक आचार संहिता व एक संविधान का निर्माण किया। इसलिए एक प्रतिष्ठान स्थापित हो जिससे सारे देश के लोग यहां आकर पत्रकारिता का नया पाठ सीखें व पुराने से परिचित हो। पत्रकारिता की संस्कृति आज लुप्त होती जा रही है। इसकी स्थापना का शुभारंभ खंडवा से ही हो ऐसा तभी होगा जब एक सर्व सुविधायुक्त प्रतिष्ठान स्थापित कर सके। बड़े-बड़े विद्यालय खोले लेकिन पत्रकारिता का मानक नहीं है। पत्रकारिता भटक रही है इसे खंडवा एक नई दिशा दे सकता है।

जल स्त्रोतों का हो संवर्धनः नगर निगम को जन सहयोग से खंडवा के पुराने जल स्त्रोतों को सहेजना चाहिए। खारी बावड़ी, खारा कुआं, माली कुआं, सीता बावड़ी आदि कई जल स्त्रोत हैं। प्रशासन, नगर निगम व जनता इन तीनों के सहयोग से यह हो। इससे जल संवर्धन होगा। साथ ही यह साफ हो सकेंगी। एक नदी कहां-कहां प्यास बुझाएगी इसलिए स्थानीय जल स्त्रोतों की तलाश कर उन्हें सहेजना आज के युग में जरूरी है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाए व उसकी देखरेख करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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