खंडवा। स्वामी विवेकानंद का चिंतन भारत के सनातन चिंतन का फलन है। वे संपूर्ण विश्व के भातृभाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। अद्वैत चिंतन जो शंकराचार्य के मुख से निसृत हुआ, वही भाव विवेकानंद के विश्व बंधुत्व का स्रोत है। एकोहम द्वितियोनास्ति के रूप में समस्त जीव यहां तक किजड़ पदार्थो में आत्मभाव की अनुभूति भारतीय दर्शन में की जाती है।

यह बात स्वामी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी और श्रीगणेश अथर्वशीर्ष मंडल द्वारा आयोजित विश्व बंधुत्व दिवस के अवसर पर साहित्यकार डॉ. श्रीराम परिहार ने की। इस अवसर पर विषय प्रवर्तन करते हुए गणेश मंडल अध्यक्ष एवं साहित्यकार सुधीर देशपांडे ने विश्व बंधुत्व के भाव की परिकल्पना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा किस्वामीजी के विचार और लक्ष्य को ध्येय मानकर विवेकानंद शिला स्मारक की स्थापना एकनाथ रानडे ने की। उनका कृतित्व विवेकानंद के बंधुत्व भाव की अगली कड़ी है। समस्त विरोधी विचारों को भी उन्होंने सहमति में बदलकर विवेकानंद स्मारक के रूप में एक प्रेरणा संपूर्ण राष्ट्र के सामने रखी। कार्यक्रम के सभापति केंद्र के पूर्व नगर संचालक सुधाकर जोशी ने केंद्र के क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन मनोज कुलकर्णी ने किया। आभार आनंद पेंडसे ने माना।