खंडवा/बीड़। निमाड़ के संत सिंगाजी की समाधि पर शरद पूर्णिमा को दर्शन के लिए आस्था उमड़ेंगी। आराध्य संत के दर्शन को निशान चढ़ाने के साथ ही महाआरती में हजारों लोग शामिल होंगे। यहां आयोजित दस दिवसीय मेले का बुधवार मुख्य दिवस होने से आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचेंगे। शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या शनिवार तक यहां 70 हजार से अधिक श्रद्घालु दर्शन कर चुके हैं। इस वर्ष सिंगाजी जलाशय में जलस्तर अधिक होने से पानी के बीच स्थित समाधि स्थल और मेला क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की तैनाती के साथ ही ड्रोन कैमरे से नजर रखी जा रही है।

निमाड़ की आस्था के प्रतीक संत सिंगाजी मेले में झाबुआ, बड़वानी, बैतूल, खरगोन के अलावा महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के श्रद्घालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मेले के मुख्य दिवस शरद पूर्णिमा पर यहां दो लाख से अधिक श्रद्घालु दर्शन करेंगे। शनिवार दोपहर से श्रद्घालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वैसे दो दिनों से निशान लेकर श्रद्घालुओं के आने तथा भजन व कीर्तन का सिलसिला चल रहा है। शरद पूर्णिमा पर अल सुबह से रात तक विभिन्ना धार्मिक आयोजन होंगे।

मंदिर के महंत रतन महारज ने बताया किरविवार सुबह 6.30 बजे समाधि का अभिषेक और आरती होगी। सुबह 11.30 बजे भोग आरती होगी। इस दौरान 15 मिनट समाधि दर्शन बंद रहेगा। शाम पांच बजे परंपरानुसार झाबुआ से आने वाला राजा बहादुरसिंह के परिवार का मुख्य निशान समाधि पर पेश होगा। शाम सात बजे दीप स्तंभ पर 164 दीप प्रज्वलित कर महाआरती की जाएगी। इसके बाद आतिशबाजी का आयोजन होगा। सिंगाजी समाधि पर मुख्य रूप से घी, नारियल, चिरोंजी की प्रसादी के अलावा विशेष रूप से केरी चढ़ती है। भक्तों की मन्नात पूरी होने पर वे यहां हलवा का कड़ावा कर भंडारा कर रहे हैं। शरद पूर्णिमा के लिए समाधि पर आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। यहां आयोजित दस दिवसीय मेले का मुख्य दिवस होने से लोग जरूरत की सामग्री खरीदने के अलावा झूलों और मनोरजंक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाते है। समाधि स्थल और मेले की व्यवस्थाओं के अलावा यहां आने वाले श्रद्घालुओं की सुविधा और सुरक्षा का ख्याल प्रशासन और पुलिस द्वारा रखा जा रहा है। एसडीएम डॉ. ममता खेड़े, जनपद सीईओ प्रवीण उईके ,एसडीओपी घनश्याम बामनिया, मूंदी थाना प्रभारी अंतिम पवार ,बीड़ चौकी प्रभारी अंजु शर्मा सहित ट्रस्ट पदाधिकारी व्यवस्थाओं में जुटे है।

संत सिंगाजी को निमाड़ का कबीर भी कहा जाता है। निमाड़ में उनके जन्म स्थान व समाधि स्थल पर उनके पदचिन्हों की पूजा-अर्चना की जाती है। उनके चमत्कार आज भी लोग महसूस करते हैं। वे नर्मदांचल की महान विभूति थे। पशुपालक श्रद्घालु उन्हें दूध और घी अर्पण करते हैं। समाधि पर लगभग 457 वर्षो से घी की अखंड ज्योत भी प्रज्वलित है।

संत सिंगाजी की समाधि खंडवा से 35 किमी दूर पीपल्या ग्राम में इंदिरा सागर बांध के बैकवॉटर के बीच बनी हुई है। सिंगाजी महाराज का समाधि स्थल इंदिरासागर परियोजना के बैकवॉटर में डूब में आने से उसके आसपास 50-60 फीट के सीमेंट कांक्रीट के परकोटे से सुरक्षति कर मंदिर बनाया गया है। समाधि तक पहुंचने के लिए दो किमी लंबा पैदल पुल बना हुआ है। गवली समाज में जन्मे सिंगाजी का मनरंग स्वामी के प्रवचनों और उनके सान्निाध्य ने हृदय परिवर्तित कर दिया और वे धर्म की राह पर चल पड़े। सिंगाजी बाल्यकाल में पशुओं को चराते थे। निमाड़-मालवा के पशु-पालकों के सिंगाजी आराध्य हैं। उनके पदचिन्ह मंदिर में स्थापित हैं। यहां अखंड ज्योत और भजन-पूजन के साथ मेलों का आयोजन भी होता है। शरद पूर्णिमा के पहले से निशान लेकर भजन गाते हुए सिंगाजी पहुंचते रहें। गुरुगादी की परंपरानुसार इस पद पर आसीन गुरु का सम्मान किया जाता है। वर्तमान में महंत रतन महाराज यहां आसीन हैं।

शनिवार को विधायक नारायण पटेल ने मेला स्थल पहुंचकर दुकानदारों और श्रद्घालुओं से चर्चा की। दुकानदारों ने बताया किहमारी दुकानों के आगे छोटी दुकानें लगाकर लोगों के बैठने से आने वाले ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदारों ने बताया कियहां किसी भी समय बिजली बंद हो जाती है जबकिपहले से बिजली के 100 रुपए अधिक लिए जा रहे हैं। विधायक पटेल ने सभी समस्याओं को जनपद पंचायत के सीईओ को इन्हें जल्द निराकृत करने के निर्देश दिए हैं।

बैकवॉटर अधिक होने से श्रद्घालुओं को स्नान करने के लिए दूधतलाई पर अस्थायी रूप से घाट बनाया गया है लेकिन यहां महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम नहीं हैं। इसके कारण महिलाओं को परेशानी हो रही है। मेला स्थल से समाधि तक पहुंचने में दिव्यांग लोगों को बाइक की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। मेले में पेयजल के लिए ट्यूबवेल में लगाई गई मोटर खराब होने तथा जनपद की ओर से एप्रोच पुल पर पेयजल की व्यवस्था नहीं किए जाने से बुजुर्ग और महिला श्रद्घालुओं को परेशान होना पड़ रहा है। स्नान करने वालों पर होमगार्ड के जवानों द्वारा सतत निगरानी रखी जा रही है। बैकवॉटर में मोटरबोट से नजर रख रहे है। रेलिंग से कूदकर पानी में स्नान के लिए जाने से रोका जा रहा है।

भक्तों के मन में संत सिंगाजी महाराज के प्रति अगाध श्रद्घा है। तेज धूप में सिंगाजी के जयकारे लगाकर दो किलोमीटर एप्रोच रोड को हर उम्र के श्रद्घालु पैदल यात्रा कर रहे हैं। शनिवार को दिनभर तेज धूप में श्रद्घालु धूप और प्यास की परवाह किए बगैर आवाजाही करते रहे। जनपद पंचायत द्वारा इस एप्रोच रोड पर किसी प्रकार की छांव और पेयजल की व्यवस्था भी नहीं की गई है।

यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है। वही वन वे मार्ग पर भी अमल शुरू हो गया है। बीड़ से गुप्ता गली होते हुए सिंगाजी जाने वाले वाहन और सिंगाजी से बीड़ आने के लिए शिवरिया की ओर से वाहनों को भेजा जा रहा है। दोनों चौराहे पर भी पुलिस बल तैनात किए गए हैं। इस मार्ग पर बड़े वाहनों को प्रतिबंधित किया गया है। शनिवार को ही वाहन पार्किंग फुल हो गई। सिंगाजी मेले में पहुंचने के लिए खंडवा और हरसूद से अतिरिक्त बसें चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही बीड़-खंडवा शटल के फेरों में वृद्घि और अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज तलवड़िया में दिया है।

कोहदड़ पंचायत अंतर्गत ग्राम बिहार से शरद पूर्णिमा पर संत सिंगाजी को निशान चढ़ाने की परंपरा का निर्वहन 35 वर्षो से किया जा रहा है। गुरुवार को ग्राम से निशान लेकर रवाना हुआ 24 लोगों का जत्था शनिवार को खंडवा पहुंचा। यहां सिंगाजी के निशान का लोगों ने जगह-जगह पूजन और आरती की। ढोलक और झांझ बजाकर सिंगाजी के भजन गाते हुए चल रहे इस जत्थे में शामिल आशाराम असलकरे, रमेश असलकरे, ताराचंद भाकरे, गजानंद असलकरे आदि ने बताया किरविवार को सिंगाजी पहुंचकर संत की समाधि पर निशान चढ़ाएंगे। यह परपंरा पीढ़ी दर पीढ़ी निभा रहे हैं।