बीड़। नईदुनिया न्यूज

शरद पूर्णिमा पर संत सिंगाजी की समाधि स्थल पर झाबुआ के राज परिवार की ओर पेश किया गया निशान शुक्रवार को पूजन कर उतारा जाएगा। इसे सम्मान के साथ पदयात्री वापस झाबुआ लेकर जाएंगे। रास्ते में जगह-जगह इसकी श्रद्धालुओं द्वारा अगवानी कर पूजन किया जाएगा। इसके चलते दो माह में झाबुआ से सिंगाजी आने वाले निशान को लौटने में चार माह लग जाते हैं। यहां से रवाना होने के बाद शिवरात्रि पर यह झाबुआ पहुंचेगा।

परंपरा के अनुसार संत की समाधि पर प्रत्येक शरद पूर्णिमा पर झाबुआ का निशान चढ़ाया जाता है। इस निशान पांच दिनों तक लहराने के बाद पंचमी को उतार कर विश्राम दिया जाता है। इसके अलावा अन्य श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए निशान को खड़ा रखा जाता है। यह प्रथा झाबुआ के राजा ने शुरू की थी। शुक्रवार को सुबह 9.30 बजे विधिविधान के अनुसार पूजन-पाठ करके सिंगाजी समाधि स्थल से वापस झाबुआ के लिए निकलेगा और शिवरात्रि के दिन झाबुआ जिले में प्रवेश करेगा।

जगह जगह होता है निशान का स्वागत

समाधि स्थल से निकलने वाले निशान का समीप के गांवों के भक्तों द्वारा उन्हें रोक लिया जाता है। स्वागत-सत्कार के साथ ही भक्तों के यहां रात्रि विश्राम भी होता है। मुख्य निशान की पूजा कर मनोकामना पूर्ण करने की विनती की जाती है।

Posted By: Nai Dunia News Network