29केएचए-01

फोटो-गुरुवार रात को झाबुआ के राजबहादुर परिवार द्वारा भेजे गए निशान को लेकर सिंगाजी महाराज के शिष्यों ने गांव में भ्रमण किया। निशान का घर-घर पूजन भी किया गया। यह निशान शुक्रवार शाम पांच बजे समाधि पर चढ़ाया जाएगा।

- शरद पूर्णिमा पर दूर-दूर से आते हैं समाधि पर शीश नवाने गुरुभाई, परंपरा अनुसार समाधि पर घी और कैरी भी चढ़ेगी-

खंडवा-बीड़ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बीड़ से सात किलोमीटर दूर स्थित सिंगाजी समाधि स्थल पर शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु निशान पेश कर दर्शन करेंगे। यहां दशहरे से दस दिवसीय मेला भी जनपद पंचायत हरसूद द्वारा आयोजित किया जाता है लेकिन इस वर्ष कोरोना की वजह से मेला निरस्त कर दिया गया है। कोरोना की वजह से मेले के अलावा समाधि की परिक्रमा, प्रसादी और अगरबत्ती पर भी प्रतिबंध से संत के आंगन में उत्सवी रंगत कुछ फीकी रहेगी। पूर्णिमा पर मुख्य रूप से झाबुआ जिले के महाराजा राजबहादुर के परिवार की ओर भेजा जाने वाला निशान चढ़ेगा। शाम में दीपमाला जगमगाने के साथ ही महाआरती होगी।

शरद पूर्णिमा पर सिंगाजी समाधि दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल आते हैं। पूर्णिमा के एक दिन पहले से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। सिंगाजी की समाधि पर 461 साल से अखंड ज्योति जल रही है। भक्तों द्वारा समाधि स्थल पर बड़ी मात्रा में शुद्ध घी चढ़ाया जाता है। इंदिरासागर के बैकवाटर में समाधि स्थित होने से करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर श्रद्धालु समाधि स्थल तक पहुंचते हैं। यहां 29 से 31 अक्टूबर तक दर्शनों का सिलसिला चलेगा।

कोरोना और आचार संहिता से टला मेला

यहां दशहरे से मेला लगता है। इसमें 500 दुकानें, होटल तथा मनोरजंन के लिए झूले आदि लगते हैं। इस वर्ष कोरोना की वजह से मेला नहीं लग सका है। वहीं प्रशासन द्वारा आचार संहिता को देखते हुए मेले की अनुमति नहीं दी गई है। पूर्णिमा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से आवश्यक सुविधाएं की जा रही हैं। श्रावण सुदी नवमी विक्रम संवत 1616 में समाधि लेना बताया गया है। तभी से यहां मेले का आयोजन हो रहा है। जो इस वर्ष नहीं लगने से श्रद्धालुओं में मायूसी है।

खजूरी में जन्मे थे संत सिंगाजी

संत शिरोमणि सिंगाजी महाराज का जन्म बड़वानी के खजूरी गांव में हुआ था। पिता भीमाजी गवली और माता गवराबाई की तीन संतान थीं। बड़े भाई लिंबाजी और बहन का नाम किसनाबाई था। सिंगाजी का जसोदाबाई के साथ विवाह हुआ था। इनके चार पुत्र कालू, भोलू, सदू और दीप थे। सिंगाजी के जन्म और समाधि के बारे में विद्वानों के मत अलग-अलग है। उनका जन्म विक्रम संवत 1574 में होना माना जाता है।

समाधि पर मुख्य रूप से चढ़ती है कच्ची कैरी

सिंगाजी महाराज के समाधि स्थल पर मन्नात पूर्ण होने पर भक्तों द्वारा हलवे की प्रसादी बना कर कड़ावा किया जाता है। मन्नात के लिए यहां उल्टा सातिया भी बनाया जाता है। मन्नात पूरी होने पर यहां आकर सीधा सातिया बनाते हैं। समाधि पर प्रमुख रूप से शुद्ध घी और शकर चढ़ाने के बाद भी चीटी नहीं होती। शरद पूर्णिमा पर संत की समाधि पर हर वर्ष कच्ची केरी विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। इस सीजन में यह कहां से आती है, कोई नहीं जानता। संत सिंगाजी की समाधि के प्रमुख महंत रतनलाल महाराज ने बताया कि यहां चढ़ने वाली केरी को लेकर कई मान्यताएं हैं। इसे मुख्य रूप से निसंतान महिलाओं को संतान प्राप्ति के लिए प्रसादी के रूप में दिया जाता है।

संत सिंगाजी समाधि ट्रस्ट के महंत रतन महाराज का कहना है कि कोरोना की वजह से विशेष सावधानी बरती जा रही है। श्रद्धालुओं को कतार में मास्क लगाकर दर्शन की व्यवस्था की है। समाधि की परिक्रमा और प्रसादी, अगरबत्ती पर रोक रहेगी। भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था के लिए 80 सेवादार तैनात किए हैं। श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है।

पेज 16 की लीड के लिए दी गई संत सिंगाजी की खबर का जोड़

संत सिंगाजी के निशान लेकर शहर से गुजर रहे जत्थे, श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे शहरवासी

29केएचए-04

फोटो-जवाहर गंज मार्ग पर निशान लेकर जा रहे युवकों को तिलक करते हुए श्रद्धालु। नईदुनिया

खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि) संत सिंगाजी समाधि स्थल पहुंचने के लिए गांव-गांव से श्रद्धालुओं के जत्थे रवाना हो रहे हैं। शहर से गुजरने वाले इन जत्थों को सिंगाजी भक्तों द्वारा तिलक लगाकर अभिवादन किया जा रहा है। शरद पूर्णिमा पर सिंगाजी के दर्शन की आस लिए भजनों के साथ पैदल निकले पांच से अधिक जत्थे खंडवा पहुंचे। श्रद्धालुओं की सेवा कर लोगों ने पुण्य लाभ कमाया।

शरद पूर्णिमा पर निमाड़ के प्रसिद्ध संत सिंगाजी महाराज की समाधि के दर्शन करने का अपना अलग ही महत्व है। पूर्णिमा पर संत की समाधि पर पहुंचने वाले के लिए यह दिन जैसे अमृत वर्षा के सामान होता है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों से निशान लेकर श्रद्धालु सिंगाजी धाम पहुंचने लगे हैं। गुरुवार को शहर में श्रद्धालुओं का जत्था पहुंचा। अलग-अलग गांवों से निशान लेकर निकले श्रद्धालुओं का खंडवा पहुंचने पर स्वागत किया गया। शहर के मुख्य मार्ग व बाजार से निशान लेकर श्रद्धालु निकले। लोगों ने निशान की पूजा कर श्रद्धालुओं को भी तिलक लगाकर सेवा की। इसके पूर्व बुधवार को रात में ग्राम बिहार से पैदल चलकर श्रद्धालुओं का जत्था खंडवा पहुंचा। हाथ में निशान थामे श्रद्धालु सिंगाजी महाराज के भजनों में लीन रहे। महिलाएं भी जत्थे में शामिल रहीं। बस स्टैंड के सामने से कहारवाड़ी होते हुए बजरंग चौक, जलेबी चौक, नगर निगम चौराहा, घंटाघर से होते हुए जत्था बॉम्बे बाजार से निकला। इस बीच मार्ग में लोगों ने निशान की पूजा कर श्रद्धालुओं की सेवा की। झांझ मंजिरे बजाते हुए भजन गा रहे श्रद्धालुओं का कुछ युवकों का अपने मोबाइल से वीडियो बनाया तो किसी ने फोटो खिंची। देर रात श्रद्धालु मूंदी मार्ग से सिंगाजी महाराज के मंदिर जाने के लिए रवाना हुए।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस