खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बर्ड फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की हैचरी

में कड़कनाथ मुर्गों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। पिछले तीन दिनों से बाहरी व्यक्ति के प्रवेश से लेकर अधिकारी भी अंदर नहीं जा रहे। दाना-पानी देने वाले भी बगैर मास्क व ग्लब्ज के अंदर प्रवेश नहीं कर रहे। प्रदेश की दूसरी बड़ी हैचरी में इस समय 500 कड़कनाथ मुर्गे-मुर्गियां हैं। वहीं लगभग 600 चूजों का उत्पादन हर माह होता है। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह ही खंडवा में भी बर्ड फ्लू से अब तक 130 के

लगभग जंगली पक्षियों क मौत हो चुकी है। जिसके बाद पशु चिकित्सा विभाग ने एडवायजरी जारी करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी थी। जिले के सभी पोल्ट्री फार्म संचालकों को दिशा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र में कड़कनाथ मुर्गों के लिए हैचरी में इसी का पालन करते हुए सतर्कता बरती जा रही है। 2017 से शुरू की गई इस पोल्ट्री में सिर्फ कड़कनाथ मुर्गे को ही रखा जा रहा है। इसके साथ ही यहां पर हैचरी भी लगाई गई है। जिससे हर माह लगभग 600 अंडों से चूजे का उत्पादन किया जा रहा है। झाबुआ के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी हैचरी हैं। यहां से हर साल लखनऊ, मुंबई, गोरखपुर, गांधी नगर, इटारसी, नागपुर, होशंगाबाद, रायपुर सहित अन्य शहरों के लिए बड़ी संख्या में लोग चूजे व मुर्गे लेकर जाते हैं।

आसपास के पेड़ों की हुई छटाई

केंद्र के आसपास लगे बड़े पेड़ों की कटाई कराई गई है। इसके साथ ही पोल्ट्री के पास से कचरा व झाड़ियों की भी छंटनी कराई गई है। ताकि किसी भी पक्षी के वहां बैठने की संभावना से बचा जा सके। पोल्टी के आसपास मुर्गियों को डालने वाला दान न गिरे इसके लिए भी ध्यान रखा जा रहा है।

किसानों के जाने पर भी रोक

जिले में लगभग 50 किसान कड़कनाथ का पालन कर रहे हैं। जब माता अंडे देती है तो वे इसे हैचरी में रखकर जाते हैं। यह सुविधा कृषि विज्ञान केंद्र ने इन्हें निशुल्क दे रखी है ताकि किसान प्रोत्साहित हो। किसान इनका पालन कर रहे हैं उनके लिए यहां पर वैक्सीनेशन व अन्य सावधानी बरतने के लिए

सलाह भी दी जा रही है।

1100 अंडे रखने की हैचरी की क्षमता

केंद्र में हैचरी के लिए दो मशीनें लगाई गई है। जिसमें एक साथ 1100 अंडे रखे जा सकते हैं। एक निश्चित तापमान पर इन्हें रखा जाता है। हर माह इन मशीनों से 600 के लगभग अंडों से चूजे निकाले जाते हैं। जबकि झाबुआ में2500 अंडो को हैचरी में रखने के लिए व्यवस्था है। वहीं हर माह लगभग 15 सौ

अंडों से चूजे निकलते हैं। प्रदेश में दतिया, होशंगाबाद, बुरहापुर, हरदा,ग्वालियर,धार, छिंदवाड़ा में भी कड़कनाथ की हैचरी हैं लेकिन उत्पादन को लेकर खंडवा कृषि विज्ञान केंद्र की हैचरी दूसरे नंबर पर आती है।

चूजे निकालने के बाद 15 दिन रखते हैं निगरानी

मशीन में 200-200 की रैक में अंडे रखे जाते हैं। लगभग 20 से 25 दिनों में उनमें से चूजे निकलते हैं। फिर इन्हें 15 दिनों तक गर्मी में रखा जाता है व टीकाकरण किया जाता है। इसके बाद ही इन्हें बेचा जाता है। यहां पर 500 रुपये में एक मदर बर्ड व 70 रुपये में एक चूजा बेचा जाता है। एक साल में

लगभग 5 लाख रुपये की आय केंद्र को इससे होती है। वहीं किसानों को भी पालन पर आय होती है।

रख रहे सावधानी

संभावित खतरे को देखकर एडवायजरी का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। अंदर एक या दो देखरेख करने वाले सिर्फ दाना-पानी देने के लिए ही जा रहे हैं। बाहरी लोगों का प्रवेश निषेध कर दिया है। परिसर के बड़े पेड़ों की छंटाई कराई जा चुकी है। प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी कड़कनाथ मुर्गों की हैचरी

होने पर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।

-डॉ. सुभाष रावत, प्रभारी कड़कनाथ हैचरी

Posted By: Nai Dunia News Network

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