मनीष करे

खंडवा।

संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना की तीसरी इकाई से 25 जुलाई तक विद्युत उत्पादन शुरू हो जाएगा। करीब दस माह पूर्व टरबाइन में तकनीकी खराबी के बाद से इकाई बंद है। इसके एक माह बाद चार नंबर इकाई में भी खराबी आने पर मरम्मत के लिए दोनों टरबाइन के रोटर गुजरात भेजे गए थे। इनमें से चार नंबर इकाई ढ़ाई माह पूर्व (लाइटअप) सिंकोनाइज हो चुकी है। वहीं तीन नंबर इकाई की टरबाइन भी एक सप्ताह पूर्व परियोजना पहुंचने पर इसे इंस्टाल (स्थापित) करने के लिए एलएडटी की जंबो टीम ने काम शुरू कर दिया है। गुजरात से आई करीब 100 लोगों की टीम 32 दिनों में इसे स्थापित करेंगी।

सिंगाजी परियोजना की 1320 मेगावाट क्षमता की सुपर क्रिटिकल दोनों विद्युत इकाईयों की चिमनी जल्द ही फिर धुआं उगलने लगेंगी। इकाई नंबर तीन और चार की टरबाइन में बड़ी तकनीकी खराबी आने से इन्हें मरम्मत के लिए एलएडंटी और जापान की मित्शुविशि कंपनी के गुजरात स्थित हजीरा वर्कशाप भेजा गया था। टरबाइन के रोटर की ब्लेड क्षतिग्रस्त हो जाने से तीन नंबर इकाई की ब्लेड को 20 अक्टूबर को गुजरात भेजा गया था। वहीं चार नंबर इकाई का रोटर पांच दिसंबर को रवाना हुआ था। मरम्मत के बाद दोनों टरबाइन वापस आ चुकी हैं। एलएंडटी और एमपीपीजीसीएल के इंजीनियर की टीम द्वारा मार्च में चार नंबर टरबाइन को इंस्टाल करने के बाद इससे विद्युत उत्पादन जारी है। वहीं अब एमपीपीजीसीएल का लक्ष्‌य 25 जुलाई तक तीसरी इकाई से विद्युत उत्पादन शुरू करने का है। यह इकाई शुरू हो जाने से परियोजना की दोनों 660-660 मेगावाट क्षमता की सुपर क्रिटिकल इकाईयों से बिजली का उत्पादन पूर्ण क्षमता से शुरू हो जाएगा। वर्तमान में परियोजना की 1200 मेगावाट क्षमता की इकाई नंबर एक और दो से विद्युत उत्पादन मांग के अभाव में ठप है।

2500 करोड़ से अधिक की उत्पादन हानि

विदित हो कि सुपर क्रिटिकल दोनों इकाई से विद्युत उत्पादन ठप रहने से एमपीपीजीसीएल को 2500 करोड़ रुपये से अधिक की विद्युत उत्पादन हानि हो चुकी है। वहीं तकनीकी खराबी की वजह से इनका पीएलएफ बिजली उत्पादन भी अत्यंत कम रहा हैं। वर्ष 2021 में तीन नंबर इकाई का पीएलएफ 04.87 फीसद और चार नंबर इकाई का 09.88 फीसद ही रहा है। जो अन्य गैर सुपर क्रिटिकल इकाईयों की तुलना में बेहद कम है। जानकारों का कहना है कि विद्युत नियामक आयोग के मापदंडों के अनुसार परियोजना की इकाई से 85 फीसद पीएलएफ सालाना बिजली का उत्पादन होना चाहिए है।

पीजी टेस्ट की तैयारी में टरबाइन हुई क्षतिग्रस्त

जिले में 2520 मेगावाट क्षमता की संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगालिया में मात्र एक इकाई से विद्युत उत्पादन जरूरत के अनुसार हो रहा है। विदित हो कि पीजी टेस्ट के लिए पांच अगस्त को तीन नंबर इकाई को पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन के लिए चलाने पर टरबाइन असंतुलित होने से इसे बंद कर दिया था। खोलने पर टरबाइन के रोटर की चार से अधिक ब्लेट क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। टरबाइन के रोटर में इस प्रकार की क्षति से परियोजना से लेकर एमपीपीजीसीएल मुख्यालय जबलपुर तक हड़कंप मच गया था। करीब एक लाख घंटे सतत चलने की गारंटी वाली टरबाइन तीन हजार घंटे भी नहीं चल पाने को बड़ी खामी मानते हुए इससे स्थापित करने वाली एलएंडटी और संचालन करने वाली एमपीपीजीसीएल के अधिकारी मामले को उजागर करने की बजाए पहले तो एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा कर लापरवाही से बचने में लगे रहे। करीब तीन माह बाद मामला उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद इसकी जांच शुरू हुई। टरबाइन में सोडियम युक्त पानी जाने से ब्लेड क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आने पर इसकी पुष्टि के लिए तीन नंबर इकाई के साथ ही स्थापित की गई चार नंबर इकाई को खोलकर जांच करने का निर्णय लिया गया। इसे खोलने पर इसकी टरबाइन में भी खराबी मिलने पर रोटर का खोलकर मरम्मत के लिए गुजरात भेजना पड़ा था।

संत सिंगाजी परियोजना की तीन नंबर इकाई की फिटिंग का कार्य शुरू हो चुका है। 25 जुलाई तक इसे सिंकोनाइज करने का लक्ष्‌य है। चार नंबर इकाई से विद्युत उत्पादन जारी है।

- आरपी पांडे, पीआरओ सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना।

Posted By: Nai Dunia News Network

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