Khandwa News:श्रीधूनीवाले दादाजी धाम में सोमवार को श्रीकेशवानंद (बड़े दादाजी महाराज) का बरसी उत्सव उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही श्रीदादाजी दरबार में समाधि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया जो देर रात तक चलता रहा। उत्सव की महाआरती 108 दीपकों से रात आठ बजे की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में दादाजी नाम गूंज उठा। सुबह से शाम तक करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात और दिल्ली तक से भक्त दादाजी की समाधि के दर्शन करने के लिए आए।दूर-दूर से आए भक्तों बड़े दादाजी और छोटे दादाजी की समाधि के दर्शन करने के साथ ही धूनीमाई में हवन भी किया। सुबह से शाम तक धूनी में करीब दो हजार से अधिक नारियलों की आहूति दी गई।

मालपुए, हलवे का भोग

वर्ष 1930 में खंडवा में समाधिस्थ हुए बड़े दादाजी की बरसी पर सोमवार को श्रीदादाजी धाम में रौनक बढ़ गई। भज लो दादाजी का नाम, भज लो हरिहर जी का नाम के जयकारों के साथ दरबार में आने वालों की आस्था देखते ही बन रही थी। मंदिर ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार श्रीदादाजी धाम में प्रतिदिन की तरह मां नर्मदा की पूजा-अर्चना के साथ समाधियों की सेवा और अभिषेक तथा मालिश हुई। उत्सव के विशेष अवसर पर दादाजी को मालपुए और हलवे का भोग लगाया गया। दरबार में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के भोजन के लिए हाल में व्यवस्था की गई थी। इसी तरह मंदिर परिसर में ही स्थित हरिहर भवन की ओर से भी श्रद्धालुओं को केले के पत्तों पर भोजन प्रसादी परोसी गई।

मां नर्मदा की परिक्रमा करते हुए आए थे दादाजी

श्रीकेशवानंद महाराज बड़े दादाजी मां नर्मदा की परिक्रमा पर निकले थे। वे परिक्रमा करते हुए बड़वाह से खंडवा आए थे। तीन दिन खंडवा में रुके। अगहन सुदी तेरस तीन दिसंबर 1930 को वे खंडवा में ही समाधिस्थ हो गए। जिस स्थान पर उन्होंने धूनी रमाई थी, वहीं पर श्रीछोटे दादाजी (श्री हरिहर भोले भगवान) ने जमीन खरीदी और मंदिर बनाया था। उन्होंने 12 साल तक आश्रम का संचालन किया। छोटे दादाजी के समाधिस्थ होने के बाद आश्रम की व्यवस्था स्वामी चरणानंदजी ने संभाली।

Posted By: Nai Dunia News Network

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