खंडवा। मनमानी ब्याज पर जरूरतमंदों को रुपए देकर शोषण करने की बढ़ती शिकायतों और जिले में सूदखोरों के आतंक से परेशान होकर लोगों द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने की घटनाओं को देखते हुए खंडवा पुलिस सजग हो गई है। लोगों को सूदखोरों के चुंगल से मुक्त करने के लिए पुलिस ने सामाजिक सरोकार अंतर्गत ऐसे मामलों की अलग से जांच कर लोगों को राहत देने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत जिले के पुलिस थानों में विशेष शिविर आयोजित किए हैं। आमजन समस्याओं और सरकारी योजनाओं के संबन्ध में लगने वाले शिविर की तरह ही पुलिस थानों में पंडाल लगाकर पीड़ितों की सुनवाई की जाएगी।

पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने बताया कि जिले में चिटफंड और सूदखोरों के विरूद्ध प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष शिविर आयोजित किए गए है। उन्होंने बताया कि यह शिविर जिले के सभी पुलिस थानों में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित होंगे। नागरिकों चिटफ़ंड व सूदखोरों से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए अपने निकटतम पुलिस थाने में उपस्थित होकर अपनी समस्या का निराकरण करवा सकते है।

कोरोना ने बनाया कर्जदार

कोरोना की वजह से इस वर्ष व्यापार- व्यवसाय लंबे समय तक प्रभावित होने से कई व्यापारियों और परिवारों को रोजगार के संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई कारोबार और उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। ऐसी स्थिति में जीवन यापन और परिवार का गुजर-बसर लोगों के लिए चुनौती बन गया है। इससे निपटने के लिए कई लोगों द्वारा सूदखोरों से रुपए उधार लेने तथा कई हितग्राही अपनी बैंक की किस्त आदि का समय पर भुगतान नहीं कर पाने से परेशान होकर आत्महत्या जैसे कदम उठा चुके हैं। कोरोना काल में शहर में ऐसी आधा दर्जन घटनाएं सामने आ चुकी है, इनमें सिंधी कॉलोनी के किराना व्यवसाई रामनगर का टेंट व्यवसाई सहित कई व्यापारी और आम लोग आर्थिक संकट से जूझते हुए आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। वही अभी भी कई लोग परेशानियों का सामना करने को विवश है।

10 से 30% तक वसूलते हैं ब्याज

सूदखोरों द्वारा जरूरतमंद लोगों का जमकर शोषण किया जाता है ,उन्हें दी गई राशि के बदले में प्रतिमाह 10 से लेकर 30% तक का मनमाना ब्याज वसूलने से कर्ज लेने वाला व्यक्ति इनके चुंगल से आसानी से मुक्त नहीं हो पाता है। एक बार सूदखोर से कर्ज लेने के बाद कई बार तो मूलधन की तुलना में दोगुना से भी अधिक राशि जमा करने के बाद भी सर से कर्ज का बोझ नहीं उतर पाता है। शहर में कई सूदखोरों द्वारा कर्ज देते समय दस्तावेजी कार्रवाई के साथ कर्जदार से उसके एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक तक ले ली जाती है। इसकी मदद से नौकरी पेशा लोगों की तनख्वाह खाते में आने पर स्वयं ही राशि का आहरण कर लेते हैं।

आईजी के निर्देश चली थी मुहिम

करीब 4 साल पूर्व शहर में पुलिस द्वारा सूदखोरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई थी। इंदौर पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में शहर के कई बड़े रसूखदार सूदखोर और सफेदपोश लोग बेनकाब हुए थे ।इन पर सख्त कार्रवाई से काफी हद तक आर्थिक शोषण के मामलों पर लगाम लगी थी। छापे की कार्रवाई में पुलिस को सूदखोरों के पास से लोगों के मकान और जमीनों की रजिस्ट्रियां, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड सहित बड़ी संख्या में लेन देन का लेखा जोखा बरामद हुआ था। इस दौरान ऐसे कई मामले उजागर हुए थे जिनमें लोग सालों से कर्ज की तुलना में दो तीन गुना राशि चुकाने के बाद भी कर्ज से मुक्त नहीं हो पा रहे थे। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस थानों में कई बार सुनवाई नहीं होने से सूदखोरों का मनोबल बढ़ जाता है। खंडवा पुलिस द्वारा इस दिशा में उठाया गया कदम और आयोजित शिविर सूदखोरों से परेशान लोगों के लिए नई सुबह साबित होंगे।

Posted By: Prashant Pandey

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