खंडवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। गर्मी के कारण जहां कई क्षेत्रों में जलसंकट विकराल रूप ले रहा है, वहीं रेलवे स्टेशन भी इससे अछूता नहीं है। रेलवे स्टेशन और कॉलोनियों में वितरण के लिए रोजाना 10 लाख लीटर पानी की खपत होती है। स्टॉप डेम का जलस्तर घटने, चार ट्यूबवेल सूखने और कुएं में पानी कम होने के कारण रेलवे रोजाना 40 हजार लीटर पानी खरीद रहा है। निजी टैंकरों से पानी रेलवे के प्लांट में भेजा जा रहा है। इससे रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के पेयजल, सफाई सहित रेलवे कॉलोनियों में वितरण किया जाता है।

रेलवे ने आबना नदी पर स्टॉप डेम बनाया है। यहां से पानी घासपुरा के ट्रीटमेंट प्लांट में पानी पहुंचता है। इसके साथ प्लेटफॉर्म नंबर छह के पास भी एक प्लांट बना है। यहां एक कुआं और चार ट्यूबवेल हैं। इसके बाद स्टेशन पर जल वितरण किया जाता है। दोनों ही प्लांट में जल संकट की स्थिति है। आबना नदी का जलस्तर घटने से प्लांट में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। इसके साथ ही प्लांट के चारों ट्यूबवेल सूख गए हैं और कुएं का पानी भी घट गया है। ऐसे में रेलवे रोजाना 40 हजार लीटर पानी खरीद रहा है। इस पानी से रेलवे स्टेशन और कॉलोनी में जलापूर्ति की जा रही है।

प्याऊ और स्टॉल पर भी आती है दिक्कत

रेलवे स्टेशन पर भी जल वितरण में विलंब के कारण कई बार दिक्कत होती है। स्टेशन के प्याऊ सूखे नजर आते हैं, वहीं यहां स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए गए पेयजल स्टॉल पर पानी नहीं पहुंच पाता। इससे यात्रियों को परेशान होना पड़ता है।

ट्यूबवेल सूखे

जलसंकट के कारण बाहर से पानी लेना पड़ रहा है। ट्यूबवेल सूख गए हैं, वहीं प्लांट व कुएं का जलस्तर भी कम हो गया है। ऐसे में रोजाना 40 हजार लीटर पानी खरीद रहे हैं। तीन पुलिया के पास वाटर रिसायकलिंग प्लांट बनाने का प्रस्ताव मध्य रेलवे को भेजा गया है। - जेवाय जोशी, सीनियर सैक्शन इंजीनियर

गंदे पानी को साफ कर हो सकता है स्टेशन पर उपयोग

खंडवा। तीन पुलिया के पास नाले से बहने वाले ड्रेनेज के पानी को साफ कर रेलवे स्टेशन पर उपयोग किया जा सकता है। यहां वाटर रिसायकलिंग प्लांट बनने से खंडवा जंक्शन को सफाई व शौचालय के उपयोग के लिए पानी मिल सकता है। इससे रोजाना करीब पांच लाख लीटर रॉ वाटर की पूर्ती स्टेशन पर हो सकेगी। पुणे रेलवे स्टेशन की तर्ज पर यह प्लांट बनाया जा सकता है। जानकारों के अनुसार करीब एक करोड़ दस लाख रुपए की लागत से यह प्लांट आकार ले सकता है।

रेलवे स्टेशन और कॉलोनियों में वितरण के लिए रोजाना करीब 10 लाख लीटर पानी की खपत होती है। इसमें सात लाख लीटर पानी (रॉ वाटर) सफाई, शौचालय व अन्य कार्यों में उपयोग में आता है और तीन लाख लीटर पानी पीने के उपयोग में लिया जाता है। जल संकट की आशंका को देखते हुए खंडवा रेलवे स्टेशन पर वाटर रिसायकलिंग का नवाचार किया जाना चाहिए। यहां तीन पुलिया के पास से बहने वाले नाले के पास वाटर रिसायकलिंग प्लांट बनाने की योजना बनाई गई है। यह प्लांट रोजाना करीब पांच लाख लीटर पानी को रिसायकल करेगा। इससे मिलने वाला रॉ वाटर स्टेशन पर सफाई कार्य, सुविधाघर और अन्य उपयोग में आ सकेगा। अगर इस प्रस्ताव को मंडल की मंजूरी मिल जाती है तो खंडवा भुसावल मंडल का ऐसा पहला स्टेशन होगा, जहां इस तरह का प्लांट बनाया जा रहा है।

पुणे की तर्ज पर ले सकता है आकार

मध्य रेलवे में इससे पहले पूणे में वाटर रिसायकलिंग प्लांट बन चुका है। यहां स्टेशन के पास बने वाटर रिसायकलिंग प्लांट से रोजाना करीब 7 लाख लीटर पानी की रिसायकलिंग हो रही है। खंडवा में भी यह प्लांट बनने से स्टेशन पर उपयोग में आने वाले करीब 70 फीसद रॉ वाटर की पूर्ति हो जाएगी।

व्यर्थ बहता है लाखों लीटर

शहर के अधिकांश हिस्सों का ड्रेनेज का पानी यहीं से बहता है। बारिश के दौरान तो यहां से इतना पानी बहता है कि रास्ता बंद हो जाता है। वर्ष भर लाखों लीटर पानी रोजाना यहां से व्यर्थ बह जाता है। इसको देखते हुए रेलवे ने यहां वाटर रिसायकलिंग प्लांट का प्रस्ताव बनाया है।

जरूरी है ट्रीटमेंट प्लांट

जलसंकट को देखते हुए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जरूरी है। पुणे रेलवे स्टेशन की तर्ज पर यहां प्लांट बनाया जा सकता है। इससे तीन पुलिया के पास नाले से बहने वाले 5 लाख लीटर गंदे पानी को रोज रिसायकल किया जा सकेगा। गर्मी के दौरान कई बार नदी में पानी कम होने से जलसंकट की स्थिति बनती है। वाटर रिसायकलिंग प्लांट बनने के बाद रॉ वाटर की अधिकांश पूर्ति इसी पानी से हो जाएगी। केवल पीने का पानी ही डेम से लेना पड़ेगा। इससे रेलवे कॉलोनियों में पानी की सप्लाय डेम के माध्यम से सुचारू रूप से हो सकेगी। - एसबी सिंघल, सेवानिवृत्त सीनियर सैक्शन इंजीनियर, मध्य रेलवे