सुमित अवस्थी, खंडवा। द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक हरिभाऊ सालुंके बुधवार को 100 वर्ष के होंगे। इस अवसर पर सैनिक कल्याण कार्यालय से भूतपूर्व सैनिक और प्रशासनिक अधिकारी उनका सम्मान करने पहुंचेंगे।

100 साल की आयु में भी हरिभाऊ को कनाड़ा से आने वाले वाहनों की असेंबलिंग, खंडवा में बनी हवाई पट्टी और अंग्रेजों के ठहरने के लिए बने गोरा बैरक सहित द्वितीय विश्व युद्ध की कई घटनाएं याद हैं। वे बिना चश्में के अखबार पढ़ लेते हैं और रोज सैर पर भी जाते हैं। युवाओं के लिए उन्होंने कहा कि कम खाकर स्वस्थ्य रहें और गम खाकर क्रोध छोड़ें व सामंजस्य बैठाएं।

हरिभाऊ के 100वें जन्म दिन पर जहां सैनिक कल्याण कार्यालय उन्हें सम्मानित करने घर पहुंचेगा, वहीं उनके परिजन भी उत्साहित हैं। मुंबई, भोपाल, धुनिया सहित अन्य शहरों से परिजन खंडवा पहुंच गए हैं। हरिभाऊ कहते हैं कि कल को लेकर मैं कभी आज चिंता नहीं करता, जब कल आएगा जो परिस्थिति होगी, उसका सामना करेंगे। इसके लिए आज से चिंतित होने की जरूरत ही नहीं।

उन्होंने कहा कि मैंने अपनी पत्नी और बच्चों पर कभी क्रोध नहीं किया। उनकी गलतियों पर हमेशा समझाइश दी। ऐसे में उनकी गलती भी सुधर गई और दोनों को तनाव भी नहीं हुआ। परिवार मेरा पूरा ख्यान रखता है इसलिए मैं आज भी सैर पर जाता हूं, अखबार पढ़ता हूं और पूरी तरह स्वस्थ्य हूं। इसके साथ ही वे कहते हैं कि पत्नी सोनाबाई ने भी हमेशा साथ निभाया और मेरी ताकत बनकर मेरे साथ रहीं।

यह पहुंचे हरिभाऊ का जन्मदिन मनाने

हरिभाऊ का 100वां जन्मदिन मनाने के लिए उनकी बेटी मनोरमा कारले धुलिया, बेटा गोपाल सालुंके भोपाल और बेटे दीलिप, अशोक व जयदीप का परिवार मुंबई से खंडवा पहुंचा है। परिवार में पोता-पोतियों सहित 55 से अधिक परिजन यहां आए हैं।

हरिभाऊ दूसरे विश्व युद्ध की इन घटनाओं को करते हैं याद

  • अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीयों को दबा कर रखा गया, लेकिन जब युद्ध में जरूरत पड़ी तो भारतीय युवा ही ब्रिटिश सेना की ताकत बने और दूसरे विश्व युद्ध में उनकी ओर से लड़े।
  • खंडवा में करीब 1940 में सेना में भर्ती होने के बाद हरिभाऊ को सेना की मैकेनिकल विंग में होने के कारण कोलकाता भेजा गया। वहां वे कनाडा से आने वाले वाहनों की असेंबलिंग करते थे।
  • सितंबर 1946 में युद्ध समाप्त होने पर सेना के कई जवान आजाद हिंद फौज का हिस्सा बन गए। हरिभाऊ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर रेलवे में चले गए।
  • खंडवा में बनी हवाई पट्टी पर गोला-बारूद लेकर आते थे ब्रिटिश हवाई जहाज और आनंद नगर के गोरा बैरक में ठहराया जाता था विदेशी सैनिकों को।

Posted By: Hemant Upadhyay