ओंकारेश्वर। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की महासवारियां धूमधाम से निकाली गई। सवारियों ने नगर भ्रमण किया। इस दौरान एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सवारियों पर गुलाब के फूल और गुलाल उड़ाकर स्वागत कर भोलेनाथ के दर्शन किए। गुलाल के गुबार से तीर्थनगरी की सड़कें और सवारी में शामिल श्रद्धालु गुलाबी रंग में सराबोर हो गए।

चौथा सोमवार होने से भगवान ओंकारेश्वर नगर भ्रमण करते हुए भगवान ममलेश्वर से मिलने पहुंचे। इस दौरान बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के बीच श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए हर-हर भोले.., बोल बम के जयकारे तीर्थनगरी में गूंजते रहे। बड़ी संख्या में कावड़ियों ने भी भोलेनाथ पर जल अर्पित कर पुण्य लाभ लिया।

सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ओंकारेश्वर मंदिर के पट एक घंटे पहले सुबह चार बजे ही खोल दिए गए थे। साढ़े चार बजे से श्रद्धालुओं को दर्शन करवाना शुरू कर दिया गया था। नर्मदा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान ओंकारेश्वर व ममलेश्वर ज्योतर्लिंग पर जल और पूजन सामग्री अर्पित की।

दोपहर 12.20 से 1.20 बजे तक भोग के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए थे। इसके बाद दर्शन-पूजन का सिलसिला सायं चार बजे तक चलता रहा। इसके पश्चात भोलेनाथ पर सीधे जल अर्पित करने पर प्रतिबंध लगाकर श्रद्धालुओं को दूर से दर्शन करवाए गए। दोपहर दो बजे भगवान ओंकारेश्वर व ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारियां मंदिर से नर्मदा के घाटों के लिए रवाना हुईं।

ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के सहायक कार्यपालन अधिकारी अशोक महाजन व सवारियों के प्रभारी आशीष दीक्षित ने बताया कि दोपहर दो बजे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पंचमुखी रजत मुखौटे को चांदी की पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित जनसमुदाय द्वारा भगवान की सवारी पर गुलाब के फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया।

बैंडबाजे और ढोल-ताशे के साथ सवारी कोटितीर्थघाट के लिए रवाना हुई। आदिगुरु शंकराचार्य गुफा के सामने से होती हुई सवारी दोपहर 2.30 बजे कोटितीर्थघाट पहुंची। यहां वेदाचार्य पंडित राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व में सैकड़ों पंडित-पुजारियों द्वारा भोलेनाथ के पंचमुखी रजत मुखौटे का पूजन-अभिषेक किया गया। धार्मिक अनुष्ठान होने के बाद भगवान ओंकारेश्वर की सवारी को सुसज्जित नावों में विराजमान कर नौका विहार करवाया गया।

इसी तरह भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग सवारी भी दोपहर दो बजे मंदिर से रवाना होकर जूना अखाड़े के सामने से होती हुई श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ाघाट पहुंची। पंडित-पुजारियों द्वारा धार्मिक अनुष्ठान करवाने के बाद भोलेनाथ को नौका विहार के लिए रवाना किया गया।

दोनों भगवानों की सवारियों ने ओंकारेश्वर व ममलेश्वर मंदिर के ठीक सामने नर्मदा नदी में पांच बार परिक्रमा लगाई। इसके बाद सवारियां नौका विहार करती हुई कोटितीर्थघाट, गौमुखघाट, चक्रतीर्थघाट, पुराने व नए झूला पुल सहित अन्य घाटों पर पहुंची। श्रद्धालुओं द्वारा सवारियों पर गुलाब के फूलों और गुलाल उड़ाने और हर-हर महादेव.., भोले शंभू, जय शिवशंकर जैसे नारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

भगवान ओंकारेश्वर व ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारियां ममलेश्वर मार्ग हुोती हुई जूना अखाड़ा पहुंची। यहां महामंडलेश्वर स्वामी धर्मेंद्रपुरी महाराज द्वारा दोनों सवारियों का स्वागत किया गया। शाम छह बजे दोनों ही सवारियां ममलेश्वर मंदिर परिसर के अंदर पहुंची। यहां दोनों भगवानों का मिलन हुआ।

मंदिर के पंडित-पुजारियों दोनों ही सवारियों का ब्राह्मणपुरी, गजानन भक्त निवास के सामने पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। सवारियों में भूतों की बारात, 12 ज्योतिर्लिंगों की आकृतियां भी शामिल थीं।

Posted By: Hemant Upadhyay