खंडवा/ सिहाड़ा, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर गोकुलगांव में एक सप्ताह से जमीन के अंदर हलचल और गड़गड़ाहट की आवाज आ रही है। तीन दिन पहले गांव के पास जमीन का एक हिस्सा दलदली हो गया। यहां पीले मिट्टी के साथ बुलबुले उठने और हल्के धमाकें सुनाई देने से लोग चिंतित हैं। मंगलवार रात और बुधवार दोपहर में तेज धमाका महसूस होने और कुछ घरों की दीवारों में दरारें आने से ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। भूकंप की आशंका में सहमे हुए लोग रात जागकर काट रहे हैं। गोकुलगांव लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक कोई प्रभावी प्रयास या आपदा प्रबंधन का कोई कदम नहीं उठाया है। वहीं जानकारों का कहना है कि निमाड़ में भूकंप की संभावनाओं को देखते हुए यह भूकंप के सिस्मिक जोन व्ही में दर्ज है।

इसके चलते यहां भूकंपरोधी भवन की जरूरत को देखते हुए भूकंपरोधी भवन निर्माण अनिवार्य किया गया है। विडंबना यह है कि नगर निगम द्वारा केवल कागजों पर औपचारिकता निभा कर बहुमंजिला भवनों को निर्माण की स्वीकृति धड़ल्ले से दी जा रही है। दहशतजदा ग्रामीणों को एसडीएम और राजस्व अमला गांव पहुंच कर संयम बरतने की समझाईश दे रहा है। साथ ही इस भूगर्भीय हलचल की वजह जानने के लिए जल्द नागपूर से जियोलॉजिक्ल एस्पर्ट की सर्वे टीम आने की बात तीन दिनों से कही जा रही है। सिहाड़ा के निकट गोकुलगांव में हो रही भूगर्भीय हलचल पंधाना में लगी सिस्मोग्राफ मशीन पर अभी तक दर्ज नहीं हुए हैं।

वैसे खंडवा और निमाड़ के जिले भूकंप की फाल्ट लाईन में स्थित होने से यहां भूगर्भीय हलचल और गड़गड़ाहट का इतिहास रहा है। करीब 25 साल पहले जिले की पंधाना तहसील के आधा दर्जन गांवों में लंबे समय तक भूगर्भीय हलचल चली। इस दौरान जमीन से लगातार गड़गड़ाहट और कंपन लोगों ने महसूस किया लेकिन कोई पांच तीव्रता से अधिक का कोई झटका या तबााही जैसी स्थिति सामने नहीं आई थी। लगभग डेढ़ से दो माह तक टाकलीकला, बगमार, सारोला के बाद अहमदपुर खैगांव में ग्रामीण दहशत में रहे।

नागपुर से आए भूगर्भशास्त्री और जानकारों ने कई दिनों तक यहां डेरा डालकर विभिन्न अनुसंधान करने के साथ ही प्रशासन द्वारा भूकंप से बचाव के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी, प्रशिक्षण और राहत सामग्री आादि मुहैया करवाई गई थी। इसके शासन स्तर से जिले को भूकंप के सिस्मिक जोन व्ही में मानकर यहां बनने वाले भवनों में भूकंपरोधी तकनीक अपनाने तथा बड़े भवनों को नगर निगम द्वारा इसी आधार पर निर्माण की अनुमति देने की अनिवार्यता की गई थी। इसके बावजूद शासकीय और निजी भवनों के निर्माण में इस शर्त की अवेहलना हो रही है। विड़बना यह है कि नगर निगम से नक्शा पास करवाने के दौरान कागजों में भूंकपरोधी तकनीक अपनाने और डिजाईन आदि का हवाला रहता है लेकिन भवन निर्माण के दौरान इसकी अवेहलना पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। ना ही ऐसे किसी मामले में आज तक कोई कार्रवाई सामने आई है। नगर निगम आयुक्त हिमांशु सिंह ने बताया कि भवन निर्माण की अनुमति शासन की गाइड लाइन और प्रावधानों के आधार पर दी जाती है। नगरीय क्षेत्र में निर्माणाधीन और निर्मित बहुमंजिला भवन शासकीय होने से इन्हें निगम से अनुमति नहीं लगती। निजी क्षेत्र के बहुमंजिला भवनों की निर्माण अनुमति से सभी बिंदुओं का ध्यान रखा जाता है। अलग-अलग भवनों के लिए अलगअलग मापदंड हैं।

गांव पहुंचे विधायक, लिया जायजा

बुधवार को विधायक देवेंद्र वर्मा ने गांव पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने ग्रामीणों से भूगर्भीय हलचल के बारे में जानकारी ली। विधायक वर्मा ने ग्रामीणों से कहा की डरने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों की टीम आ रही है। भूगर्भीय हलचल का कारण पता चल जाएगा।

गांव में दहशत का माहौल

गोकुलगांव में दहशत का माहौल बना हुआ है। बुधवार को दोपहर में करीब 12.30 बजे फिर से जमीन से आवाज आने के साथ ही थर्राने लगी। इससे ग्रामीण अपने घरों से बाहर आ गए। गांव में हो रही इस तरह की भूगर्भीय हलचल से लोगों में भय बना हुआ है। लोगों अधिकांश समय खेत और घरों से बाहर आंगन और गांव की चौपाल पर बिता रहे हैं। दोपहर में हुई घटना से ग्रामीण उभरे भी नहीं थे कि शाम को करीब 5.35 बजे 5.39 बजे और रात करीब 8 बजे फिर से जमीन से हलचल महसूस हुई। योगेश चौहान ने बताया कि दोपहर से रात में करीब आठ बजे तक चार बार जमीन में कंपन महसूस हुआ। इसके साथ ही आवाज भी आई। इससे सभी में भय है।

दरारें आने से मकान गिरने का खतरा बढ़ा

भूगर्भीय हलचल से घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। धमेंद्र तंवर, कैलाश तंवर और दिलावर शान के घर की दीवारों में दरार पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है घरों की दीवारों में दरारों के बाद मकान गिरने का खतरा बढ़ गया है। इस तरह जमीन में कंपन होता रहा तो हमारा मकान गिर सकता है।

प्रशासन रख रहा नजर

ग्राम गोकुलगांव में भूगर्भीय हलचल की जानकारी के बाद राजस्व अधिकारी गांव जाकर लोगों को धैर्य बरतने की समझाईश दे रहे हैं। इसकी सूचना नागपुर जियोलॉजिकल विभाग को दे दी है। अवकाश की वजह से टीम को आने में विलंब हुआ है। प्रत्येक स्थिति पर नजर रखी जा रही है। - तन्वी सुंद्रियाल, कलेक्टर