सुमित अवस्थी, खंडवा। खंडवा के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अपनी छाप छोड़ी है। बोरगांवखुर्द के किसान जगदीश पटेल की बेटी माधुरी ने बुलगारिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कुश्ती स्पर्धा में विदेशी पहलवानों को चित कर चौथा स्थान हासिल किया है, वहीं खालवा के वनग्राम गुलाई के किसान रामदास का बेटा सिमकू तड़ोले खेल विभाग की दौड़ में अव्वल आया है। इसी तरह 14 साल के ताइक्वांडो खिलाड़ी आदित्य मसानी ने गत दिनों वियतनाम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया है।

पिता ने कहा -देश का नाम करना है रोशन, मैं मेहनत में जुट गई

माधुरी पटेल

यूरोप के बुलगारिया में आयोजित कुश्ती स्पर्धा में बोरगांव खुर्द की माधुरी पटेल ने देश का प्रतिनिधित्व किया। अंडर-41 किलो वजन वर्ग में उसने कई विदेशी पहलवानों को हराया। माधुरी को खेल स्कॉलरशिप भी मिली है। वह अभी भोपाल के टीटी नगर में खेल अभ्यास के साथ 10वीं की पढ़ाई कर रही है। माधुरी कहती है कि बचपन में ही पिता ने कह दिया था कि कुश्ती में देश का नाम रोशन करना है। तब से मैं लगातार पूरी मेहनत से जुटी हूं। पिता जगदीश का कहना है कि बोरगांव खुर्द से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में पहुंचकर माधुरी ने गांव का मान बढ़ाया है। मेरा भरोसा है कि वह देश के लिए एक दिन कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतेगी।

कॉलेज में आकर एथलेटिक्स को समझा सिमकू, फिर रुका नहीं

सिमकू तड़ोले

खालवा के आदिवासी वनग्राम गुलाई से 2016 में सिमकू खंडवा के एसएन कॉलेज में आया। किसान के बेटे सिमकू को यहां आकर पता चला कि एथलेटिक्स में दौड़ के लिए स्पर्धा भी होती है। वह ट्रॉयल में शामिल हुआ और शानदार प्रदर्शन किया। खेल प्रशिक्षक अमितकुमार अब्राहम ने उसे प्रेरित किया। तब से वह दौड़ में ऐसा आगे निकला कि अब तक नहीं रुका। गत दिनों पीथमपुर में हुई छह किलोमीटर की दौड़ में उसने पहला स्थान हासिल किया। इससे पहले जिला और संभाग स्तर की कई स्पर्धा में वह प्रथम स्थान हासिल कर चुका है। एमए प्रीवियस में अध्ययनरत सिमकू अब क्रॉस कंट्री रेस में नेशनल टूर्नामेंट में जाने की तैयारी कर रहा है।

बचपन से लिया ताइक्वांडो का प्रशिक्षण, देश को दिलाया मैडल

आदित्य मसानी

कहा जाता है कि कुछ लोग किसी विशेष कार्य के लिए ही बने होते हैं। ऐसी ही कहानी है 14 साल के आदित्य मसानी की। आदित्य ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेकर देश को पदक दिलाए हैं। वियतनाम में हुई ताइक्वांडो चैंपियनशिप में उसने रजत पदक जीता। इससे पहले वह भूटान ओपन ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुका है। पिता संजय का कहना है कि बेटे में खेल के प्रति रुझान देखकर उसे लगातार प्रेरित किया। भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच सोमेश्वर राव ने कहा पढ़ाई के अधिक दबाव से बच्चे खेलों में पिछड़ जाते हैं। कि माता-पिता अगर बच्चों में खेलों के प्रति रुचि देखें तो उन्हें प्रेरित करें।