Navratri 2021: गोविंद गीते, खंडवा। बढ़ते अपराध और दुराचार के प्रति नारी को सशक्त करने की जिद जुनून में बदल गई। पहले खुद आत्मरक्षा का हुनर सीखा फिर अपने इस हुनर के जरिए युवतियों को निडर बनाकर उनके आत्मबल को मजबूत किया। मार्शल आर्ट के क्षेत्र में यह शैलपुत्री स्वरूपा माता-पिता का नाम रोशन कर रही है। गणेश तलाई निवासी 27 वर्षीय नेहा यादव महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों और दुराचार से निपटने के लिए दृढ़ता से काम कर रही हैं। अब तक 25 हजार युवतियों को मार्शल आर्ट और कराते की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्र की युवतियां और महिलाएं भी शामिल हैं। नेहा बताती हैं कि महिलाओं पर अत्याचार के मामले सामने आने और निर्भया कांड जैसी घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया।

तभी से प्रण लिया कि मैं खुद भी सशक्त बनूंगी और इस तरह के अपराधों से लड़ने के लिए दूसरों को भी तैयार करूंगी। कक्षा सातवीं में कराते की ट्रेनिंग लेनी शुरू की। इस कला में ब्लैक बेल्ट फर्स्ट डान डिग्री भी हासिल कर ली। इसके बाद शुरू हुआ स्कूल और कालेज में युवतियों को आत्मरक्षा के लिए जागरूक करने का सिलसिला। नेहा अभी शासकीय और निजी स्कूलों में कराते की ट्रेनिंग दे रही है।

मां ने दिया साथ

नेहा के पिता सुरेश यादव रेलवे से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मां फूलवती गृहिणी हैं। नेहा बताती हैं कि मां भी विद्यार्थी जीवन में रस्सी कूद स्पर्धा में नेशनल प्लेयर थीं। बाद में रूढ़िवादी सोच के चलते वे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना पूरा नहीं कर पाईं। नेहा के अनुसार इसी तरह की स्थिति मेरे साथ भी थी। खेल सीखने जाने पर पाबंदी थी, लेकिन मैंने जिद की। मेरी रुचि को देखते हुए मां ने बहुत साथ दिया। कराते के क्षेत्र में नेहा को वर्ष 2019 में टीचर नेशनल अवार्ड उदयपुर राजस्थान में दिया जा चुका है। शिक्षा विभाग की ओर से वीरांगना पुरस्कार-2017 में मिला। पुलिस विभाग की ओर से सशक्तीकरण सम्मान से भी नेहा सम्मानित की जा चुकी हैं। आज उनकी इस उपलब्धि पर माता-पिता को गर्व है।

Posted By: Prashant Pandey

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