खंडवा, ओंकारेश्वर नईदुनिया प्रतिनिधि। भाद्रपद की पूर्णिमा पर ओंकारेश्वर में नर्मदा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान नर्मदा नदी में पानी की कमी से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बांध के गेट बंद रहने तथा बिजली उत्पादन के लिए टरबाइन भी नहीं चलने से तीर्थनगरी में नर्मदा का पानी घाटों से दूर चला गया है। ऐसे में श्रद्धालु घाट छोड़ कर चट्टानों पर बैठकर नहाने को विवश हैं। पैर फिसलने पर घायल होने तथा गहरे पानी में डूबने की घटनाएं बढ़ने के बाद भी प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और आस्था को नजर अंदाज किया जा रहा है। दोपहर तक 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान और दर्शन किए हैं।

पुण्य सलिला मां नर्मदा के तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनार्थ और स्नान के लिए आम दिनों के अलावा विशेष मौकों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोमवार को स्नान-दान पूर्णिमा और श्राद्ध पक्ष की शुरूआत होने से हजारों श्रद्धालु यहां आए है। गणेश जी की मूर्तियों का विसर्जन करने के लिए भी आसपास के अंचलों व शहरों से लोग पहुंचने से भीड़ बढ़ गई है।

पर्व के दौरान हजारों की संख्या में प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से श्रद्धालु परेशान होना पड़ रहा है। तीर्थनगरी की व्यवस्था को कोसते हुए चले जाते हैं इन दिनों गणेश विसर्जन को लेकर श्रद्धालुओं की आवाजाही निरंतर बढ़ रही है प्रतिदिन 25000 श्रद्धालुओं कार्य सर पहुंच रहे हैं गणेश विसर्जन के साथ ही श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होने से ब्रम्हपुरी क्षेत्र में स्थित घाट जहां नगर परिषद द्वारा गणेश विसर्जन कुंड बनाया है कुंड में गणेश विसर्जन के बाद लोग ब्रह्मपुरी घाट सहित अन्य घाटों पर स्नान के लिए पहुंच रहे हैं।

बांध प्रबंधन एनएचडीसी द्वारा पानी नहीं छोड़ने से नर्मदा बांध के नीचे एक दम सूख चुकी है। वहीं कुछ स्थानों पर गहराई होने से जमा पानी में जान जोखिम में डालकर लोगों को स्नान करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि वर्षा ऋतु में नर्मदा लबालब होना चाहिए लेकिन लोगों को नहाने तक के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। बांध प्रबंधन का कहना है कि बारिश कम होने से अभी बांध के गेट खुलने की संभावना नहीं है। वहीं बिजली का उत्पादन जबलपुर से आने वाली मांग के अनुसार किया जाता है।

तर्पण में भी हो रही परेशानी

श्राद्ध में तर्पण करने आए भक्त अपने पूर्वजों को चट्टानों पर बैठकर जल अर्पित कर रहे हैं। नर्मदा की इस हालत व व्यवस्था पर नर्मदा में आस्था रखने वालों में आक्रोश बढ़ रहा है। अन्नपूर्णा आश्रम के महंत स्वामी सच्चिदानंद गिरी महाराज ने बताया कि नर्मदा जी की स्थिति इस प्रकार देखकर बड़ा दुख होता है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होती है मां नर्मदा पर जब से बांध बने हैं नर्मदा जी का प्राकृतिक प्रवाह और अविरल धारा थम गई है। इसके लिए शासन- प्रशासन को समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

Posted By: Prashant Pandey

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