खंडवा/ओंकारेश्वर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को क्षरण को बचाने के लिए कायाकल्प किया जा रहा है। परमारकालीन मंदिर को मजबूती देने के लिए शिखर और इसके खंभों के जोड़ प्राकृतिक सामग्री से भरने के साथ ही पत्थरों को वातावरण के प्रभाव से बचाने के लिए इस पर इथाइल सिलिकेट की परत चढ़ाई जाएगी। यह कार्य सेवाभाव के रूप में मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त केमिस्ट द्वारा करवाया जा रहा है, जो एक से डेढ़ माह में पूरा हो जाएगा।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और गर्भगृह को सुरक्षित रखने तथा बारिश, गर्मी और सर्दी से ऐतिहासिक मंदिर के पत्थरों बचाने के लिए इनकी साफ-सफाई, मरम्मत और रंग-रोगन का कार्य किया जा रहा है।

प्राचीन मंदिर के निमार्ण में उपयोग हुए लाल रेतीले (रेड सेंड) पत्थरों में पानी का रिसाव रोकने और पत्थरों के जोडों को मजबूती देने के लिए चूना, उड़द, मैथीदाना, गुड़ सहित अन्य सामग्री का मिश्रण तैयार कर इसे मशीन से जोड़ों में भरा जा रहा है। पुरातात्विक विशेषज्ञ श्रीवास्तव ने बताया कि मौसम में बदलाव और वायु व ध्वनि प्रदूषण आदि से पत्थरों का क्षरण होता है। इसे रोकने के लिए इथाइल सिलीकेट नामक केमिकल का लेप लगाकर मंदिर के पत्थरों की मजबूती व उम्र बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इससे आठ से दस साल तक बाहरी आवरण को कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

भगवान ओंकारेश्वर की प्रेरणा से सेवा भाव से कार्य कर रहे मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त केमिस्ट प्रवीण श्रीवास्तव ने बताया कि सेवाकाल के दौरान सिहंस्थ में ओंकारेश्वर मंदिर के शिखर की सफाई की गई थी। इससे शिखर के पत्थरों का मूलस्वरूप नजर आने लगा था। अब इसका प्राकृतिक स्वरूप और सौंदर्य कायम रखने के लिए कायाकल्प किया जा रहा है।

ज्योतिर्लिंग मंदिर का कार्य नो प्राफिट नो लास में किया जा रहा है। इसका कोई शुल्क मैं नहीं ले रहा हूं। केवल सामग्री और लेबर भुगतान पर राशि खर्च हो रही है। इस कार्य पर करीब दस लाख रुपये खर्च होंगे।

इस कार्य से मंदिर के शिखर व गर्भगृह में पानी का रिसाव रुकने के साथ ही धब्बे व काई नहीं दिखेगी। धूल भी नहीं जमेंगी। शिखर के बाद अंदर की ओर खंभों पर केमिकल की पत्थर चढ़ाई जाएगी।

- श्रीजी मंदिर ट्रस्ट ओंकारेश्वर द्वारा पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त केमिस्ट श्रीवास्तव के मार्ग-दर्शन में श्रीजी मंदिर को मौसम के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए सेवाभाव से कार्य करवाया जा रहा है। इससे मजबूती के साथ ही पत्थरों में निखार आ जाएगा। -अशोक महाजन, सहायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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