सुमित अवस्थी, खंडवा। यूं तो प्याज काटते समय लोगों की आंख में आंसू आ जाते हैं, लेकिन इसी प्याज के उचित भंडारण की व्यवस्था हो तो खंडवा के किसानों के आंसू सूख सकते हैं। खंडवा में प्याज की बंपर पैदावार होती है। यहां का प्याज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्ना हिस्सों में भेजा जाता है। भंडारण की व्यवस्था नहीं होने पर किसान तुरंत मंडी में महज दो से पांच रुपए किलो के भाव में प्याज बेच देते हैं। इसके बाद प्याज के भाव 50 रुपए तक पहुंच जाते हैं, लेकिन इसका फायदा किसानों को नहीं मिल पाता। कई बार प्याज सड़ जाने और उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसानों को प्याज फेंकना भी पड़ता है।जागरूकता के अभाव में इस वर्ष उद्यानिकी विभाग में भंडार केंद्र खोलने के लिए एक भी आवेदन नहीं है।

खंडवा जिले के पंधाना और खंडवा तहसील में प्याज की अधिक खेती होती है। यहां 8 से 10 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती होती है। खंडवा के किसान प्याज की तीन फसल लेते हैं। गर्मी के दौरान प्रति हेक्टेयर 800 कट्टे का उत्पादन होता है, वहीं बारिश व ठंड के दौरान 500 कट्टे प्रति हेक्टेयर प्याज का उत्पादन किया जाता है। एक कट्टे में करीब 50 किलो प्याज आता है। उत्पादन के तुरंत बाद ही किसान इस प्याज को मंडी में बेच देते हैं। यहां इसका दो से पांच रुपए किलो मूल्य मिलता है। भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को प्याज के भाव बढ़ने का फायदा नहीं मिल पाता।

सालभर खिला सकते हैं 15 रुपए किलो का प्याज

भारतीय किसान संघ के संयोजक सुभाष पटेल ने बताया कि इन दिनों बाजार में प्याज के भाव 50 रुपए से अधिक हैं लेकिन प्याज की आवक के समय किसान दो से पांच रुपए किलो में प्याज बेच चुका है। शासकीय स्तर पर भंडारण की सुविधा मिले तो हम खंडवा के लोगों को सालभर 15 रुपए किलो में प्याज खिला सकते हैं।

देशभर में भेजा जाता है प्याज

प्याज के व्यापारी प्रकाश माखिजा ने बताया कि खंडवा का प्याज देशभर में जाता है। पंजाब, दिल्ली, उप्र व दक्षिण भारत से आने वाली डिमांड के अनुसार वहां प्याज भेजा जाता है। अगर भंडारण सुविधा मिले तो किसानों के साथ व्यापारियों को भी फायदा होगा।

किसानों के साथ बने योजना

पोखर के किसान सुंदर पटेल ने बताया कि उद्यानिकी विभाग को किसानों के साथ बैठकर योजना बनाना चाहिए। इससे किसान भंडारण केंद्र के लिए जागरूक होगा। इसके साथ ही शासकीय स्तर पर भी यहां भंडारण की व्यवस्था होना चाहिए। जिससे किसानों को प्याज का उचित मूल्य मिल सके।

मिलती है सबसिडी प्याज का भंडारण केंद्र बनाने पर किसानों को सबसिडी दी जाती है। तीन से साढ़े तीन लाख रुपए में भंडारण केंद्र बनता है। इस पर किसानों को 50 प्रतिशत सबसिडी दी जाती है। इस वर्ष प्याज भंडारण केंद्र को लेकर किसी किसान का आवेदन नहीं है।

- मोहनसिंह मुजाल्दे, उप संचालक, उद्यानिकी