सुमित अवस्थी, खंडवा। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले दो भाई अनिल बरोले और अखिलेश बरोले ने गणित को आसान बनाने में कई प्रयोग किए हैं। अनिल ने ऐसी घड़ियां बनाई हैं, जिसमें समय देखने से पहले गणित हल करना पड़ता है। इससे मिलने वाला उत्तर ही समय को इंगित करता है। दूसरी ओर अखिलेश बरोले वैदिक गणित के माध्यम से विद्यार्थियों की तर्कशक्ति बढ़ा रहे हैं, वहीं उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के गणित हल करने की आसान पद्धति सिखा रहे हैं। दोनों ही शिक्षकों के स्कूलों में गणित का रिजल्ट शत-प्रतिशत है।

सूत्र से गणित हल करने पर आता है समय

धनगांव हायर सेकंडरी स्कूल के शिक्षक अनिल बरोले ने दो घड़ियां बनाई हैं। इन्हें नाम दिया गया है गणितीय समयचक्र। एक घड़ी में छटवीं से आठवीं तक के गणितीय फॉर्मूले हैं और दूसरी में नौवीं से बारहवीं तक के फॉर्मूलों को लिया गया है। इन घड़ियों में कांटे तो हैं लेकिन समय के अंक नहीं हैं। इसकी जगह पर एक सवाल दिया गया है, जिसे सही सूत्र से हल करना है। जब सवाल सही तरीके से हल होता है जो उत्तर प्राप्त होता है वही घड़ी का सही समय है।

खासियत यह है कि अगर विद्यार्थी सवाल गलत भी कर रहा है तो उत्तर और कांटों के संकेतों का मिलान कर वह सुधार कर सकता है। शिक्षक बरोले कहते हैं कि विद्यार्थी आकर्षित होकर इससे गणित हल करते हैं और समय निकालते हैं। इससे विद्यार्थियों का गणित के प्रति डर खत्म हो गया है। वे बताते हैं कि उन्होंने 10वीं गणित के लिए एक पुस्तक गणित वैतरणी भी बनाई है। इससे बोर्ड के विद्यार्थियों को काफी मदद मिली। शिक्षा विभाग ने पुस्तक का वितरण सभी स्कूलों में कराया था। परीक्षा में 80 प्रतिशत प्रश्न इसी पुस्तक में से आए थे।

गणित की बेहतर शिक्षण पद्धति वैदिक पुस्तकों में

गणेशगंज हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ शिक्षक अखिलेश बरोले कहते हैं कि गणित की बेहतर शिक्षक पद्धति हमारी वैदिक पुस्तकों में है। वे वैदिक गणित के माध्यम से न केवल गणित हल करने की आसान पद्धतियां सिखा रहे हैं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवा रहे हैं। नौवीं और दसवीं के विद्यार्थी वैदिक गणित सीखकर अब इंजीनियरिंग, प्रबंधन और बैंकिंग परीक्षा में आने वाले गणितीय तर्कशक्ति के प्रश्न भी हल करने लगे हैं। शिक्षक बरोले का कहना है कि वैदिक पद्धति में गणित हल करने की शॉर्ट ट्रिक्स हैं।

इसमें श्रीधराचार्य सूत्र, न्यूनेन-पूर्णेन, उद्धतिरभ्यास और वर्णमूल ज्ञान जैसे कई सूत्र हैं जो गणित को आसानी से हल करने में सहायक होते हैं। विद्यार्थी भी उत्साह के साथ इन पद्धतियों को सीख रहे हैं। इससे उन्हें गणित का डर नहीं लगता, बल्कि वे खेल की तरह बार-बार वैदिक सूत्रों का प्रयोग कर गणित करते हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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