खंडवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। संतों की सीख जीवन में उजाला कर देती है तो उनसे हुआ संवाद जीवन की राह आसान कर देता है। ऐसा ही हुआ खंडवा के यूसुफ रजा के साथ। 1981 से 1984 के बीच यूसुफ ने मदर टेरेसा को कई पत्र लिखे। मदर टेरेसा ने इन पत्रों का जवाब दिया और कहा कि खुद को ऐसा उपकरण बना लो जो दूसरों की सेवा का जरिया बन जाए। उनके यह पत्र यूसुफ के जीवन में शिक्षक बन गए और उन्हें जीवन की राह दिखा दी। शिक्षक दिवस पर नईदुनिया की विशेष खबर। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के साथ ही संत मदर टेरेसा की पुण्यतिथि है।

यूसुफ की खंडवा के बॉम्बे बाजार में कलर-पेंट की दुकान है। बोहरा समाज के यूसुफ सभी धर्मों का समान रूप से आदर करते हैं। नियम से बोहरा मस्जिद जाते हैं, वहीं रामनवमी पर निकलने वाली रथयात्रा पर फूल बरसाकर स्वागत भी करते हैं। वे संत मदर टेरेसा को गुरु मानते हैं और उनकी चिट्ठियों को अपना शिक्षक मानकर जीवन में आगे बढ़े हैं। वे कहते हैं कि जीवन में जब भी जरूरत होती है मदर टेरेसा के यह खत मुझे राह दिखाते हैं।

जरूरतमंद को देखकर याद आ जाती है मदर टेरेसा की बात

मदर टेरेसा ने पत्र में लिखा था कि खुद को ऐसा उपकरण बना लो जो दूसरों की सेवा का जरिया बन जाए। यूसुफ कहते हैं कि शहर में जब भी किसी जरूरतमंद या बेसहारा को देखते हैं तो मदर टेरेसा की बात याद आ जाती है। वे कई लोगों को आशाधाम में भर्ती करा चुके हैं। यहां सिस्टर्स बेसहाराओं की देखभाल करती हैं।

पुस्तक में किया मदर टेरेसा की सीख का उल्लेख

यूसुफ ने एक पुस्तक लिखी है 'स्टोरी ऑफ ए सक्सेसफुल एमआर' इसमें एक मेडिकल रिप्रजेंटेटिव के सामने आने वाली चुनौतियां और इनका हल बताया गया है। अंग्रेजी और संवाद कौशल पर आधारित इस किताब में भी यूसुफ ने मदर टेरेसा की सीख का उल्लेख किया है और सेवा का महत्व बताया है।

खंडवा से रहा है मदर टेरेसा का नाता

खंडवा के इंदौर रोड पर आशाधाम आश्रम है। यहां बेसहारा और जरूरतमंदों को रखकर उनकी सेवा की जाती है। भोजन, देखभाल के साथ ही उनका उपचार भी कराया जाता है। इस आश्रम की नींव मदर टेरेसा ने ही रखी थी, तब से आज तक यहां कई मंदबुद्धि, वृद्ध और बुजुर्ग रह रहे हैं। सिस्टर्स उनकी सेवा करती हैं।