फोटो- 5 जनवरी 1995 को पहली महापौर चुनी गईं अणिमा उबेजा ने नगर निगम प्रशासक की उपस्थिति में पदभार ग्रहण किया था।

- अलग-अलग चुनाव चिन्ह पर कांग्रेस से दो गुट थे मैदान में

- कांग्रेस से 32 और भाजपा से 13 पार्षदों ने हासिल की थी जीत

- प्रतिद्वंदी से तीन वोट अधिक हासिल करके अणिमा उबेजा बनी थीं महापौर

- गोविंद गीते

खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगर निगम खंडवा में महापौर का पहला चुनाव राजनीतिक टसल और गुटबाजी के बीच हुआ था। 1995 में हुए इस चुनाव में कांग्रेस के दो गुट अलग-अलग चुनाव चिन्ह से मैदान में थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी भी चुनाव लड़े थे। इस त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस के 32 और भाजपा के 13 पार्षद प्रत्याशी जीते थे। इन्हीं पार्षदों द्वारा निष्ठावान कांग्रेस से अणिमा उबेजा पहली महापौर के रूप में चुना गईं।

मध्यप्रदेश में पंचायती राज की शुरुआत 1995 में तात्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा की गई थी। इसमें 33 फीसद आरक्षण महिलाओं को दिया गया था। इसी आरक्षण के तहत खंडवा में प्रथम महापौर के रूप में महिला आरक्षण हुआ। उस समय शहर में 45 वार्ड हुआ करते थे। इन 45 वार्डों कांग्रेस से दो-दो प्रत्याशी मैदान में थे। इसमें एक प्रत्याशी हाथ का पंजा निशान से तो दूसरा प्रत्याशी निष्ठावान कांग्रेस नामक दल से चुनाव लड़ा।भाजपा ने भी 45 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस त्रिकोणिय मुकाबले के बीच कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी ताल ठोंकी थी। जब पार्षद चुनाव के परिणाम आए तो निष्ठावान कांग्रेस को 15 और सत्तापक्ष कांग्रेस के 16 प्रत्याशी जीते। वहीं भाजपा से 13 प्रत्याशियों ने बाजी मारी। वहीं एक निर्दलीय प्रत्याशी हुकम मेलुंदे भी जीते थे, जिन्होंने निष्ठावान कांग्रेस को अपना समर्थन दे दिया। इस तरह कांग्रेस के 32 प्रत्याशियों ने जीत हासिल कर ली।

इस तरह रोचक हो गया महापौर का चुनाव

वर्ष 1995 में पार्षदों के जरिए महापौर चुनने का नियम था। ऐसे में पार्षद चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों ने महापौर के लिए वोटिंग की थी। इस वोटिंग के दौरान भाजपा भी दो गुटों में बंटी नजर आई। कांग्रेस के 32 विजयी पार्षद प्रत्याशियों में से महापौर पद के लिए एक नाम पर सामंजस्य नहीं हो सका। ऐसे में निष्ठावान कांग्रेस से अणिमा उबेजा और सत्ता पक्ष कांग्रेस की पार्षद गीता मिश्रा के बीच वोटिंग हुई। बहुमत नहीं होने के कारण भाजपा से कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं रहा। हालांकि वोटिंग के दौरान भाजपा भी दो गुट में बंट गई। एक गुट तत्कालीन विधायक हुकुमचंद यादव का तो दूसरा पूर्व विधायक पूरणमल शर्मा का था। हुकुमचंद यादव के समर्थक पार्षदों का झुकाव निष्ठावान कांग्रेस की महापौर प्रत्याशी अणिमा उबेजा की ओर था। जबकि पूरणमल शर्मा के पक्ष के पार्षदों का झुकाव सत्ता पक्ष कांग्रेस प्रत्याशी गीता मिश्रा की ओर था। इसमें गीता मिश्रा को 21 और अणिमा उबेजा को 24 मत मिले। इस तरह अणिमा उबेजा की जीत हुई। उन्होंने 5 जनवरी 1995 को पहली महापौर के रूप में नगर निगम में पदभार ग्रहण किया। वहीं उपमहापौर के रूप में कांग्रेस के रमजान भारती को पार्षदों द्वारा चुना गया। उपमहापौर की दौड़ में कांग्रेस से रमजान भारती, सलीम पटेल और भाजपा से राजेश डोंगरे शामिल थे।

साइकिल चुनाव चिन्ह से जीती थीं अणिमा उबेजा

शहर की पहली महापौर बनीं अणिमा उबेजा ने निष्ठावान कांग्रेस दल से रामेश्वर वार्ड क्रमांक 43 (वर्तमान में वार्ड क्रमांक 47) से पार्षद का चुनाव लड़ा था। उनके सामने समक्ष सत्ता पक्ष कांग्रेस से सरोज मिश्रा और भाजपा से 000 काजले मैदान में थीं। चुनाव में अणिमा उबेजा ने जीत हासिल की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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