खरगोन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आम नागरिकों में जागरूकता की कमी दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन और स्वास्थ्य अमले ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारी शुरू दी है। जिला अस्पताल परिसर में आक्सीजन प्लांट सहित चिल्ड्रन आइसीयू का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। परिसर में दो आक्सीजन प्लांट बनाए जाएंगे।

जिला अस्पताल परिसर में अजीम प्रेमजी फांउडेशन द्वारा तैयार किए जाने वाले आक्सीजन प्लांट की मशीनें पहुंच गई हैं, जिन्हें जल्द ही इंस्टाल कर प्लाट शुरू किया जाएगा। इस संबंध सिविल सर्जन डा. दिव्येश वर्मा ने बताया कि जिला मुख्यालय पर अगस्त माह में दो आक्सीजन प्लांट शुरू किए जाने की योजना है। दूसरा प्लांट द्वारा केंद्र स्तर से स्वीकृत है, उसका अस्पताल परिसर में बने रैन बसेरा के पास प्लेटफार्म बनाने का कार्य चल रहा है। दोनों प्लांट की क्षमता 1600 किलो एलपीएम रहेगी। डा. वर्मा ने बताया कि इसके साथ जिला अस्पताल में बच्चों के लिए शिशु गहन चिकित्सा इकाई का काम भी चल रहा है। चिल्ड्रन आइसीयू का निर्माण पूराने मेटरनिटी वार्ड किया जा रहा है। इसकी क्षमता 10 बेड की होगी। इसमें वेंटिलेटर सहित अन्य अत्याधुनिक मशीनें बच्चों के लिए लगाई जाएंगी।

40 बेड का अलग वार्ड भी किया जा रहा तैयार

सिविल सर्जन डा. वर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों की सुरक्षा के लिए चिल्ड्रन आइसीयू के साथ ही एसएनसीयू में भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में 40 बेड का बच्चों के लिए अलग से वार्ड भी तैयार किया जा रहा है। इसमें आक्सीजन सप्लाय की भी व्यवस्था की जाएगी। डा. वर्मा ने बताया कि प्रयास किए जा रहे हैं कि अगस्त में अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। इन वार्डों में 0 से 18 वर्ष तक बच्चों का उपचार किया जाएगा। डा. वर्मा ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमित 370 मरीजों को भर्ती किया था। जबकि अस्पताल की क्षमता 300 बेड की है।

दवाइयों का किया स्टोर, ताकि परेशानी ना हो

डा. वर्मा ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दवाइयों और आवश्यक इंजेक्शन कमी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस परेशानी से निपटने के लिए जिला अस्पताल के स्टोर में पर्याप्त दवाइयों का इंतजाम भंडारण कर किया गया है। जिला अस्पताल में वर्तमान समय में प्रतिदिन 550 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 70 से 80 मरीज 0 से 18 वर्ष के बच्चे होते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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