सब कुछ होने के बाद भी

जो दान न करे वह है दरिद्र

भागवत कथा : आठवें दिन सुदामा चरित्र का वर्णन, आज होगी पूर्णाहुति

भीकनगांव। नईदुनिया न्यूज

जब व्यक्ति कोई अच्छा कार्य करता है तो समाज उसका उपहास उड़ाता है। फिर भी व्यक्ति अडिग रहता है तो समाज उसका विरोध करता है। इसके बावजूद जब वह व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता ही रहता है तो अंततः समाज उसका सम्मान करता है। यह बात सुरेंद्रनाथ शास्त्री (अयोध्या) ने नगर के जीवदया गौशाला में आयोजित भागवत कथा के आठवें दिन कही। उन्होंने कहा कि आजकल माताएं बच्चों को बचपन से ही बोतल से दूध पिलाती हैं। बड़ा होकर वह बोतल थाम लेता है। माताएं बच्चों को संस्कार दें ताकि वे बड़े होकर आपका ध्यान रखें।

शास्त्रीजी ने कहा कि धन का दान करने से कभी कमी नहीं आती। कुछ लोग सुदामा को दरिद्र कहते हैं मगर यह सर्वथा अनुचित है। सुदामा दरिद्र नहीं गरीब थे। दरिद्र उसे कहते हैं जो सब कुछ होने के बाद भी दान नहीं करता, वह दरिद्र है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा प्रेम यज्ञ का आयोजन कर मातृ शक्ति ने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। समस्त महिला रामायण की ओर से शास्त्रीजी से निवेदन किया गया कि वे 108वीं कथा भीकनगांव में करके अपने संकल्प की पूर्णाहुति करें। 12 जनवरी को आचार्य रोहित पांडे के आचार्यत्व में सुबह 9 से 12 बजे तक यज्ञ होगा। इसमें मंडल व श्रद्धालु आहुति समर्पित करेंगे।

'मनुष्य को हमेशा अहंकार से बचना चाहिए'

करही। मनुष्य को हमेशा अहंकार से बचना चाहिए। धरती पर जन्म लेने वाले व्यक्ति को अपना जीवन सुधारने के लिए अपने मन में परोपकार के भाव उत्पन्ना करने की आवश्यकता है। इस सांसारिक जीवन में सद्भाव के कर्म से ही आगे बढ़ा जा सकता है। यह बात ग्राम करोंदिया में भागवत कथा में मुक्तामणि तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि आज के युग में सभी माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर व कलेक्टर बनाना चाहते हैं लेकिन भक्त नहीं बनाना चाहते। छह वर्ष की आयु में ध्रुव ने भगवान को पा लिया था क्योंकि उसे बाल्यावस्था से ही भगवान में आस्था थी।

'आओ सखियों मुझे सुंदर सजा दो...'

बिस्टान। आओ सखियों मुझे सुंदर सजा दो, आओ मुझे मेहंदी लगा दो, मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो। जैसे भजन भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को कथा पंडाल में गूंजे। कथा में श्रीकृष्ण-रूक्मणि विवाह हुआ। सजीव झांकी सजाई गई। कथावाचक ममता पाठक ने बताया कि रुक्मणि, मां लक्ष्मी का रूप थी। वह ऐसे मनुष्य शिशुपाल से कैसे विवाह कर सकती थी जो काल के अधीन था। कथा में भजन की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे। पंडाल में श्रीकृष्ण की बारात आई और रुक्मणि का भगवान ने वरण किया। श्रद्धालुओं की ओर से एक सोने की मय पेंडल चेन व जाधव टांटिया मोहल्ले की ओर से सोने के मोती व पेंडल कन्यादान में दिए गए।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में झूमे भक्त

लोनारा। पृथ्वी पर जब-जब धर्म की हानि हुई और असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब प्रभु का अवतरण हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अवतार के बाद भक्तों को अपनी बाल लीलाओं से आनंद प्रदान करने के लिए भगवान ने सोलह कलाओं से परिपूर्ण स्वरूप प्रकट किया था। यह बात शुक्रवार को ग्राम घेघांव में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन पीपरी के दामोदर शास्त्री ने कही। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।

पूर्णाहुति के साथ श्रीराम कथा का समापन

पिपपल्या बुजुर्ग। कुवाजा भीलट शिखरधाम में चल रही श्रीराम कथा का शुक्रवार को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। अंतिम दिन कथावाचक मनोज महाराज ने कहा कि रावण को अहंकार आ गया था। अहंकार के कारण पूरे कुल का नाश हो गया। इस युग में व्यक्ति अहं को त्याग ईश्वर में ध्यान लगाए तो जीवण मरण के चक्र से छूट सकता है। नदी पार आजाद नगर की प्रियंका का चयन पटवारी परीक्षा में हो जाने पर शिखरधाम में 21 हजार रुपए दान स्वरूप भेंट किए।

फोटो 11केजीएन 154 कुवाजा भीलट शिखरधाम में यज्ञ में आहुति देते हुए श्रद्धालु।

फोटो 11केजीएन 155 ग्राम घेघांव में भागवत कथा का वाचन करते दामोदर शास्त्री।

फोटो 11केजीएन 163 ग्राम करोंदिया में कथा के अंत में आरती करते हुए श्रद्धालु।

फोटो 11केजीएन 166 बिस्टान में कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह हुआ।

फोटो 11केजीएन 169 भीकनगांव में भागवत कथा में सुदामा के चरण पखारते हुए श्रीकृष्ण।

फोटो 11केजीएन 170 भीकनगांव में कथा में हाथ उठाकर जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु।