बड़वाह (नईदुनिया न्यूज)। ब्लाक की एकमात्र अंग्रेजी माध्यम की शासकीय शाला में प्रतिवर्ष प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियो की संख्या अपेक्षाकृत कम ही रहती है। कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक तीनों कक्षाओं में वांछित 40 सीटें भी नहीं भर पा रही हैं। विद्यार्थियों का अंग्रेजी विषय के प्रति भय भी प्रमुख कारण है।

निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की तर्ज पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने के लिए विभाग ने वर्ष 2015 में माध्यमिक शाला को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित कर दिया। गुणवतापूर्ण शिक्षण के लिए नए स्टाफ की भर्ती भी हुई। इसके बावजूद प्रतिवर्ष तीनों कक्षाओं में 120 सीट पर केवल 70 से 80 विद्यार्थी ही प्रवेश ले रहे हैं। जो अपेक्षा अनुरूप नहीं है। प्राचार्य अशोक खेड़े ने बताया कि कई विद्यार्थी अंग्रेजी के भय से दूसरी शालाओं में प्रवेश ले लेते हैं। जो आते हैं, उनमें से कई विद्यार्थियों को अंग्रेजी वर्णमाला भी नहीं आती। इनमें ऐसे विद्यार्थी जो थोड़ा बहुत भी अंग्रेजी विषय का ज्ञान रखते हैं, उन्हें प्रवेश देकर व अंग्रेजी विषय की निदानात्मक कक्षाएं लगाकर मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है की शाला में अपेक्षा अनुरूप प्रवेश नहीं हो रहे। प्रवेश के लिए संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक घर-घर अभिभावकों से मिल रहे हैं और पर्चों के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं।

फर्नीचर की कमी, छत भी टपकती है

शाला में मूलभूत सुविधाओं को भी कमी है। स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गया है। छत से प्लास्टर उखड़ रहा है। वर्षा होने पर छत भी टपकती है। विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त फर्नीचर भी नहीं है। एक टेबल पर तीन विद्यार्थियों को बैठना पड़ता है। शासन के द्वारा ये व्यवस्थाएं हो जाए तो शिक्षण के लिए अच्छा माहौल तैयार होगा। प्राचार्य ने बताया कि इस वर्ष शाला के विद्यार्थियों के लिए नई तरह की यूनिफार्म पहनने को मिलेगी। इतना ही नहीं, शिक्षक भी अब सिविल ड्रेस के बजाय यूनिफार्म में नजर आएंगे। निजी स्कूल की तर्ज पर प्रतिदिन बच्चों को अनुशासित तरीके से अध्यापन कार्य कराया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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