खरगोन(नईदुनिया प्रतिनिधि)।

गणपति बप्प मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आ.., भगवान गजानंद के यह जय घोष रविवार को कुंदा नदी तट पर सुनाई दिए। अनंत चतुर्दशी पर कुंदा तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की मूर्ति का पूजन और आरती के बाद विधि विधान से विसर्जन किया। इधर कई श्रद्धालुओं ने मिट्टी से बनी मूर्तियों को घरों में बर्तन में विसर्जित किया। सुबह से देर रात तक गणपति अपने गांव चले और गणपति बप्पा मोरिया के जयकारें गूंजते रहे। ढोल-ताशों के साथ नाचते हुए बच्चों की टोलियां कुंदा तट पहुंची।

कुंदा तट पर नगर पालिका द्वारा अस्थायी कुंड में मूर्तियां विसर्जित की गई। कई श्रद्धालुओं ने मूर्तियों को पानी से स्पर्श कराकर नगर पालिका के सुपुर्द किया। इधर पुराने पुल सहित अन्य क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने कुंदा नदी में भी प्रतिमाएं विसर्जित की। इस संबंध में नपा सीएमओ प्रियंका पटेल और स्वास्थ्य अधिकारी प्रकाश चित्ते ने बताया कि इस वर्ष तीन कुंडों का निर्माण किया गया है। दो कुंड कुंदा नदी तट पर और तीसरा कुंड स्नेह वाटिका में बनाया गया है। जहां विधि विधान से भगवान गणेश का विसर्जन किया गया। विभिन्ना परिवारों द्वारा अपने घरों में स्थापित मूर्तियों को नदी में विसर्जन की बजाए इन स्थानों पर मूर्तियों को सौंपा। विजर्सन का दौर शाम तक जारी रहा। इस दौरान नपाकर्मी और पुलिस जवान भी मौजूद थे।

काकड़ आरती में बड़ी संख्या पहुंचे श्रद्धालु

शहर के कुंदा तट स्थित सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में गणेशोत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह काकड़ आरती का आयोजन किया गया। अनंत चतुर्दशी को भी मंदिर में रविवार सुबह भगवान की कांकड़ आरती की गई। मंदिर के पंडित प्रणय भट्ट और कैलाश महाजन ने बतया कि काकड़ आरती में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रविवार को भी सुबह से शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शहर के जैतापुर क्षेत्र की मधुबन कालोनी में भगवान गणेश की आरती के बाद छप्पन भोग प्रसादी वितरित की गई। गणेश मंडल के अध्यक्ष कैलाश गोस्वामी, उपाध्यक्ष आनंदराम राठौड़, राजेश भावसार, राज आडतिया, सचिन गुप्ता सहित अन्य मौजूद थे।

कुंदा तट पर रही यह व्यवस्था

- भगवान के पूजन व आरती के लिए अलग से टेबल लगाई थी।

- कुंडों में टैंकरों से साफ-स्वच्छ जल भरा गया था।

- सुरक्षा के लिए कुंड के आसपास नपाकर्मी, पुलिस जवानों को तैनात किया गया।

- श्रद्धालुओं के लिए बैठने व पेयजल की व्यवस्था भी कुंड के आसपास की गई थी।

- पूजन सामग्री को नदी में प्रभावित नहीं करने दिया।

- कुंडों के आसपास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की गई।

- बड़ी मूर्तियों का स्नेह वाटिका में बनाए गए कुंडों विसर्जन किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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