ब्रजेश राठौर। खरगोन

जिले में पिछले दो वर्षों में नाबालिगों से काम कराने के मामले में प्रशासन ने दो बार कार्रवाई की। पहली कार्रवाई जुलाई 2019 में की, जिसमें आदिवासी क्षेत्रों के 109 किशोरों को खेतों में काम कराने के लिए ले जाया जा रहा था। पहली बार में प्रशासन ने खेतों में ले जाने वाले व्यक्ति और बच्चों के स्वजन को समझाइश देकर छोड़ दिया था। 26 जून 2020 को धूलकोट-धवली मार्ग पर पांच वाहनों से खेतों में काम कराने के लिए बच्चे ले जाए जा रहे थे। उन्हें चाइल्ड लाइन ने बिस्टान और भगवानपुरा पुलिस की मदद से छुड़वाया। जांच में पांच वाहनों में कुल 77 बच्चे निकले। इनमें 45 बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के थे। वाहन चालकों द्वारा श्रमिक ठेकेदार के रूप में खेत मालिकों से बाल श्रमिकों से कार्य के बदले रुपये प्राप्त करना और लोडिंग वाहन में उन्हें असुरिक्षत परिवहन किया जाना पाया गया। इन्हीं साक्ष्य के आधार पर संबंधित पांचों केखिलाफ पुलिस ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

इस संबंध में महिला और बाल विकास विभाग की सहायक संचालक मोनिका बघेल ने बताया कि इस वर्ष अब तक ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। वर्ष 2020 में छुड़ाए 77 बच्चों केलिए महिला और बाल विकास विभाग के साथ ही शिक्ष् और खाद्य विभाग द्वारा लगातार मानीटरिंग की जा रही है। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई और उनके पोषण के लिए मिलने वाले खाद्यान्ना की जानकारी ली जा रही है। बच्चों के साथ ही उनके माता-पिता की काउंसिलिंग भी की जाती है, ताकि वे बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए पहुंचाएं। बघेल ने बताया कि 77 में से 16 बच्चे स्कूल से ड्राप आउट थे। 16 निरक्षर और 38 बच्चे स्कूल में अध्ययनरत थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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