*एक हजार एकड़ कृषि भूमि में चार हजार क्विंटल बीज की होगी जरूरत

नितेश दसौंधी . ऊन

समीपस्थ ग्राम रायबिड़पुरा की आबादी 700 घरों की है। यह गांव ब्रिज गेम के अलावा सफेद मूसली के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। क्षेत्र में प्री मानसून की दस्तक व बदलते मौसम के मिजाज के बीच किसान खेत तैयार करने में जुटे हैं। गांव में इन दिनों किसान मूसली की जड़ों की सफाई कर तैयार किया गया है। दो महीनों से अपने घरो में कूलर, पंखों की हवा में सहेजकर रखे सफेद मूसली के बीजों की बोवनी करने में किसान जुटे हैं।

किसान अनिल वर्मा, आनंदराम खाटरिया, सचिन खाटरिया, दीपक पटेल ने बताया कि लगभग एक हजार एकड़ से अधिक जमीन पर सफेद मूसली बोवनी होगी। उन्होंने बताया कि यह फसल 100 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी बुआई में ज्यादा खर्च भी नहीं आता है। एक एकड़ कृषि भूमि में चार क्विंटल बीज लगाए जाते हैं। जमीन के अंदर लगने वाली इस फसल के साथ दूसरी फसल भी ली जाती है। बाजार में सफेद मूसली का बीज 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव में मिलता है। फसल तैयार होने के बाद मूसली को सुखाकर इसकी सिल्लियों को बाजारों में बेचकर तीन गुना मुनाफा कमाया जाता है। बाजार में सूखी हुई सफेद मूसली करीब एक लाख रुपये प्रति क्विंटल तक बिकती है। बीजों के महंगे दाम होने से यहां के किसान खुद बीज तैयार करते हैं। इसके लिए वे खेतों में ही कुछ मूसली छोड़ देते हैं। इसे बाद में बीज के लिए निकाल लेते हैं। इल्हें साफ करके दोबारा बोवनी कर दी जाती है। यहां के किसानों से कई लोग बोवनी के लिए बीज भी लेकर जाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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