*अधिकारी बनने की चाह में युवाओं ने दी परीक्षा

खरगोन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी पीएससी) की राज्य सेवा व वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2021 रविवार को 18 केंद्रों पर आयोजित की गई। इन केंद्रों पर 6793 अभ्यर्थियों की बैठक व्यवस्था की गई थी। दो सत्रों में आयोजित परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की प्रवेश के पहले सघन तलाशी ली गई। इस दौरान पांच हजार से अधिक युवा शामिल हुए। वहीं जांच के दौरान अभ्यर्थियों से जूते-मोजे, बेल्ट, घड़ी आदि उतरवा लिए गए। वहीं मोबाइल भी परीक्षा हाल में प्रतिबंधित रहा।

ज्ञात हो कि पहले सत्र की परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक हुई। पहले सत्र के लिए अभ्यर्थी सुबह 8.30 बजे से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने लगे। परीक्षा के दौरान कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए दो उडदस्ते बनाएं गए थे, इसमें 5-5 अधिकारी शामिल थे। कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने भी केंद्रों का निरीक्षण किया। पहली पारी में सामान्य अध्ययन का पेपर हुआ। वहीं दूसरी पारी 2.15 बजे से शुरू हुई, जो शाम 4.15 बजे तक चली। परीक्षा में नकल या गड़बड़ी रोकने के लिए अभ्यार्थियों को कड़ी जांच से गुजरना पड़ा। केंद्रों पर मोबाइल, गहने, चश्मे,घड़ी, कड़े, पर्स, टोपी, स्कार्फ, जूते, मोजे, ब्रेसलेट, इलेक्ट्रानिक डिवाइस, जैकेट आदि बाहर ही रखवाए गए।

महिला पटवारी ने भी दी परीक्षा

पहली पारी के बाद परीक्षा कक्षों से बाहर निकले अभ्यर्थी विपुल मंडलोई, नितेश चौहान ने बताया कि प्रश्न पत्र एवरेज रहा। वहीं कसरावद में पटवारी पदस्थ मनीषा सोलंकी ने भी अधिकारी बनने की चाह में परीक्षा में हिस्सा लिया। अजय सिंह सोलंकी, सुदर्शन ने कहा प्रश्न अच्छे पूछे गए थे। यह उनका दूसरा प्रयास है, इससे उन्हें प्रश्न हल करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। प्रिती कोठे ने बताया कुछ प्रश्न थोड़े कठिन लगे। पहली पारी सामान्य अध्ययन के पेपर में 100 प्रश्न 200 अंकों के पूछे गए। मध्यप्रदेश के खेल व खिलाड़ी, कला, साहित्य, भौगोलिक स्थिति, इतिहास और राजीनिक व्यवस्था से कई प्रश्न पूछे गए थे।

पहले सत्र में 1520 और दूसरे में 1553 रहे अनपुस्थित

परीक्षा प्रभारी ओमनारायण सिंह ने बताया कि सभी केंद्रों पर परीक्षा व्यवस्थित तरीके से हुई है। प्रथम सत्र में पांच हजार 273 विद्यार्थियों ने और द्वितीय सत्र में पांच हजार 240 ने परीक्षा दी है। कुल छह हजार 793 विद्यार्थियों में से प्रथम सत्र में एक हजार 520 और द्वितीय सत्र में एक हजार 553 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की नकल या शिकायत के प्रकरण सामने नहीं आए।

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