-यात्रा से लौटकर सुनाए अनुभव, गुरुद्वारे में किया स्वागत

मंडलेश्वर। नईदुनिया न्यूज

भारत का अमृतसर और पाकिस्तान के लाहौर में एक ही बोली और संस्कृति होने से हमें महसूस ही नहीं हुआ कि हम किसी दूसरे देश में हैं। गुरु नानकदेव के जन्मोत्सव में भाग लेने मंडलेश्वर से सिख दंपती सरदार त्रिलोचन सिंह छाबड़ा व गुरजीत कौर ने पाकिस्तान से लौटने के बाद इस यात्रा को सुखद अनुभव बताया।

उन्होंने बताया कि बंटवारे में सिखों के अधिकतर तीर्थ पाकिस्तान में चले गए थे। इस कारण सिखों को अपने तीर्थों में जाने का सौभाग्य कम ही मिल पाता है। पाकिस्तान में बहुत गुरुद्वारे हैं, लेकिन सबकी हालत ठीक नहीं है। पाकिस्तान के ननकाना साहेब गुरुद्वारे, जहां गुरुदेव का जन्म हुआ था, वहां जब सिखों की संगतों ने नगर कीर्तन निकाला तो सारा नगर गुरुमय हो गया। स्थानीय निवासियों ने नगर कीर्तन देखा और स्वागत भी किया।

सिख दंपती ने कहा कि 20-25 हजार की आबादी वाले ननकाना साहेब में करीब 150 सिख परिवार रहते हैं। वहां अमन और भाईचारा दिखा। उसके बाद मुस्लिम समुदाय के मिलादुन्नबी पर भी यहां जुलूस निकाला गया। इसे देखने वे अपने भारतीय साथियों के साथ गए तो लोगों ने उनका स्वागत किया। पाकिस्तान के लोग हमारे जैसे ही हैं। वहां गरीबी बहुत है। हमारे 100 रुपए के बदले पाकिस्तान के 200 रुपए हमें दिए गए। पाकिस्तान से लौटे तीर्थ यात्रियों का स्थानीय गुरुद्वारे में स्वागत किया गया। लोगों ने छाबड़ा दंपती का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। इकबाल सैफी, फिरोज सैफी, एडवोकेट ओमप्रकाश मोयदे, श्रीराम वर्मा, अमृत सिंह मुच्छाल, हरचरण सिंह मुच्छाल, रवींद्र सिंह मुच्छाल, दुर्गेश राजदीप,गुरबख्श सिंह छाबड़ा, गोल्डी छाबड़ा, लक्की छाबड़ा, प्रिंस छावड़ा आदि मौजूद थे।

19केजीएन 159 मंडलेश्वर के सिख दंपती सरदार त्रिलोचन सिंह छाबड़ा व गुरजीत कौर पाकिस्तान से लौटे। -नईदुनिया

Posted By: Nai Dunia News Network